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वाराणसी

दुर्गंध और गंदगी से जूझ रहा राम भट्ट तालाब, संरक्षण की उठी मांग

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प्रशासनिक अनदेखी से बदहाल हुआ प्राचीन राम भट्ट तालाब

वाराणसी। पंचक्रोशी परिक्रमा के चतुर्थ पड़ाव शिवपुर स्थित प्राचीन राम भट्ट तालाब में पिछले कई महीनों से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। करीब दो माह पहले सरस्वती प्रतिमा विसर्जन के दौरान प्रवाहित की गई प्रतिमाओं के अवशेष अब भी तालाब के पानी में तैरते दिखाई दे रहे हैं। इससे यहां आने वाले श्रद्धालु और आसपास के लोग काफी परेशान हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग 210 वर्ष पूर्व राजा मोती चंद ने पंचक्रोशी यात्रियों की सुविधा के लिए इस पौराणिक तालाब का निर्माण कराया था। तभी से यह तालाब राम भट्ट तालाब के नाम से प्रसिद्ध है। तालाब के चारों दिशाओं में देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं। पूर्वी तट पर प्राचीन अष्टभुजी मंदिर और शिव मंदिर स्थापित हैं, जबकि पश्चिमी छोर पर प्राचीन फलाहारी बाबा आश्रम और गणेश जी का मंदिर मौजूद है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हालांकि तालाब में फैली गंदगी और पानी से उठ रही दुर्गंध लोगों को परेशान कर रही है।

शिवपुर निवासी दुख्खु रामपाल ने बताया, “मेरे बाल्यावस्था में तालाब का जल बहुत ही स्वच्छ और शुद्ध था। हम सभी लोग इस तालाब में प्रतिदिन नहाया करते थे और पंचकोशी यात्रा के दौरान पांच क्रोशिया यात्री भी तालाब में स्नान करते थे। लेकिन वर्तमान समय में तालाब का जल पूरी तरह दूषित हो चुका है और कोई भी पंचकोशियात्री तालाब में स्नान नहीं करना चाहता।”

तालाब के उत्तरी छोर पर बने घाट पर लोग दसवां इत्यादि कर्म करने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन तालाब में फैली गंदगी और दुर्गंध के कारण लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कमलेश कुमार केशरी ने प्रशासन से मांग की कि इस प्राचीन तालाब की नियमित साफ-सफाई कराई जाए।

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पृथ्वी नाथ शर्मा ने कहा, “हमारे पिताजी बताया करते थे कि यह तालाब बहुत दूर तक फैला हुआ था और सदैव स्वच्छ जल से भरा रहता था। समय पर तालाब का संरक्षण नहीं हुआ, इस कारण घाट की सीढ़ियां क्षतिग्रस्त हैं और तालाब में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।”

पंचक्रोशी परिक्रमा के अंतर्गत आने वाले इस ऐतिहासिक राम भट्ट तालाब का विशेष महत्व है। पहले आश्रम में रहने वाले पुजारी और पांच क्रोशिया यात्री तालाब के स्वच्छ जल से स्नान और आचमन किया करते थे, लेकिन पिछले कई वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा के चलते तालाब अपना अस्तित्व खोने की स्थिति में पहुंच गया है। प्राचीन फलाहारी बाबा आश्रम के प्रमुख महंत रामदास त्यागी ने कहा कि तालाब की हालत बेहद चिंताजनक है और इसे बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि तालाब की सफाई और संरक्षण नहीं कराया गया तो यह ऐतिहासिक स्थल धीरे-धीरे अपनी पहचान खो देगा। तालाब के आसपास रहने वाले लोग इस समस्या को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

इस प्राचीन तालाब की सफाई और संरक्षण के लिए स्थानीय प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है। समय रहते यदि इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो यह पौराणिक स्थल केवल इतिहास तक सीमित होकर रह जाएगा।

राम भट्ट तालाब की मौजूदा स्थिति न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर के लिए भी गंभीर चुनौती बन गई है। स्थानीय निवासियों की मांग है कि प्रशासन इस दिशा में ठोस कार्रवाई करे, ताकि इस ऐतिहासिक स्थल को पुनर्जीवित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

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तालाब की सफाई और संरक्षण के लिए संबंधित अधिकारियों को समन्वय बनाकर कार्य करने की आवश्यकता है, जिससे इस पौराणिक स्थल की गरिमा बनी रहे और श्रद्धालुओं को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण मिल सके।

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