गाजीपुर
जमानिया में चौतरफा बगावत! सभासद, व्यापारी, अधिवक्ता और लेखपाल आंदोलित
एक ही दिन चार मोर्चों पर विरोध, नगर पालिका से तहसील तक व्यवस्था पर उठे सवाल
जमानिया (गाजीपुर)। तहसील क्षेत्र में इन दिनों आंदोलनों की तपिश चरम पर है। नगर पालिका से लेकर तहसील तक विरोध के चार मोर्चे खुल गए हैं। कहीं चेयरमैन की कथित मनमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सभासद धरने पर हैं, तो कहीं कथित दस गुना कर वृद्धि के विरोध में व्यापार मंडल ने मोर्चा खोल रखा है। जिलाधिकारी के आदेश के खिलाफ अधिवक्ता कामकाज से विरत हैं, वहीं ट्रैप कार्रवाई के विरोध में लेखपाल भी कलम छोड़कर धरने पर बैठ गए हैं।

सभासदों का मौन विरोध, तख्तियों से कार्यप्रणाली पर तंज
नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार और मनमानी के खिलाफ सभासदों का अनिश्चितकालीन धरना जारी रहा। शनिवार को सभासदों ने मौन धारण कर विरोध जताया और व्यंग्यात्मक कविताओं वाली तख्तियां हाथों में लेकर पालिका की कार्यप्रणाली पर तंज कसा।
कथित दस गुना कर वृद्धि पर व्यापारियों का धरना
गृहकर, जलकर और जल निकासी कर में कथित दस गुना वृद्धि ने व्यापार मंडल का गुस्सा भड़का दिया है। तहसील स्थित रामलीला मैदान में व्यापारियों का क्रमिक धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। व्यापारियों ने बढ़े हुए करों को वापस लेने और अन्य मांगों पर कार्रवाई की मांग उठाई।

डीएम के आदेश के विरोध में अधिवक्ताओं का कार्य बहिष्कार
तहसील में अधिवक्ताओं का विरोध भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। पांच अगस्त को जारी जिलाधिकारी के आदेश के खिलाफ बार एसोसिएशन के अधिवक्ता न्यायालयीय कार्य के साथ ही जमीन की रजिस्ट्री और पंजीकरण संबंधी कार्यों से भी विरत हैं। इससे वादकारियों की परेशानी बढ़ने के साथ सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ने की स्थिति बनी हुई है।
ट्रैप कार्रवाई के विरोध में लेखपालों ने छोड़ी कलम
इधर भ्रष्टाचार निवारण संगठन की कथित ट्रैप कार्रवाई के विरोध में लेखपालों ने भी आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। संपूर्ण कार्य बहिष्कार करते हुए लेखपालों ने सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक तहसील परिसर में धरना दिया। संघ ने अयोध्या के सोहावल तहसील में लेखपाल उत्कर्ष दीप के खिलाफ हुई ट्रैप कार्रवाई को गलत बताते हुए विरोध जताया।
चार दिशाओं से उठी विरोध की आवाज, प्रशासन के सामने चुनौती
जमानिया में चार अलग-अलग मोर्चों पर चल रहे आंदोलन अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। एक ओर पालिका के खिलाफ सभासद और व्यापारी विरोध कर रहे हैं, तो दूसरी ओर तहसील में अधिवक्ता और लेखपाल कार्य बहिष्कार कर आंदोलनरत हैं। अब सवाल यह है कि लगातार बढ़ते आक्रोश के बीच प्रशासन कब हस्तक्षेप करेगा और इन आंदोलनों का समाधान कब निकलेगा।
