वाराणसी
चार महीने में 29 दिन बजेंगी शहनाइयां, चातुर्मास-अधिमास में फिर लगेगा विराम
वाराणसी। खरमास की समाप्ति के साथ ही शहर में मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो गया है। मंगलवार को समाप्त हुए खरमास के बाद बुधवार से ही विवाह सहित अन्य शुभ कार्य शुरू हो गए हैं। हालांकि विवाह के लिए लग्न अक्षय तृतीया से प्रारंभ होंगे। आगामी चार महीनों में कुल 29 दिन विवाह के मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं, जिनमें जून माह में सर्वाधिक 10 शुभ तिथियां शामिल हैं।
खरमास, जिसे मीन संक्रांति भी कहा जाता है, 15 मार्च से आरंभ होकर 14 अप्रैल तक चला। इस अवधि में सूर्य के मीन राशि में रहने के कारण विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक रही। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय और आचार्य देवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, सूर्य के मेष संक्रांति में प्रवेश करते ही मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत हो गई है, लेकिन विवाह के लिए उपयुक्त लग्न अक्षय तृतीया से ही मिलेंगे।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार अप्रैल में छह, मई में सात, जून में दस और जुलाई में छह विवाह मुहूर्त निर्धारित हैं। अप्रैल और मई मिलाकर कुल 13 तिथियों पर विवाह संभव होंगे। नक्षत्रों के आधार पर भी कुछ शादियां संपन्न होंगी।
इस बीच 17 मई से पुरुषोत्तम मास (अधिमास) शुरू हो जाएगा, जो 15 जून तक रहेगा। इस अवधि में एक बार फिर मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा और विवाह नहीं होंगे। अधिमास की समाप्ति के बाद पुनः शुभ कार्य शुरू होंगे।
इसके अतिरिक्त 25 जुलाई से चातुर्मास आरंभ होकर 21 नवंबर तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, जिसके चलते विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
निर्धारित मुहूर्तों के अनुसार अप्रैल में 20, 21, 25, 26, 28 और 30, मई में 3, 5, 6, 7, 8, 12 और 14, जून में 19 से 25 तथा 27 से 29 और जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8 और 11 तिथियों पर विवाह के शुभ संयोग बन रहे हैं। ऐसे में सीमित समयावधि में ही विवाह समारोह आयोजित करने की आवश्यकता होगी, जिसे वर्तमान समय के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
