बलिया
कारगिल शहीद अवनीश यादव से जुड़े वादे 26 साल बाद भी अधूरे होने का परिजनों का दावा
शहीद के नाम पर स्मारक, प्रतिमा और संस्थाओं के नामकरण की मांग, परिवार ने सरकार से की पहल की अपेक्षा
कारगिल विजय दिवस पर शहीद को श्रद्धांजलि, परिजनों ने अधूरी घोषणाओं को पूरा करने की उठाई मांग
बैरिया (बलिया)। कारगिल विजय दिवस पर जहां देशभर में कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, वहीं बैरिया क्षेत्र के सिताबदियारा (दलेल टोला) निवासी कारगिल शहीद अवनीश यादव के परिजनों ने दावा किया कि उनकी शहादत के बाद की गई कई घोषणाएं आज भी पूरी नहीं हो सकी हैं। उन्होंने सरकार से अधूरे वादों को पूरा करने की मांग की।
कारगिल युद्ध में दिखाया था अदम्य साहस
परिजनों के अनुसार, अवनीश यादव कम उम्र में भारतीय सेना में भर्ती हुए और वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान वीरता का परिचय देते हुए दुश्मन सैनिकों का मुकाबला किया। 4 सितंबर 1999 को वह मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
अधूरी घोषणाओं का किया जिक्र
परिजनों का कहना है कि शहादत के बाद गांव में शहीद की प्रतिमा स्थापित करने, स्मारक द्वार बनाने तथा स्थानीय अस्पताल और विद्यालय का नाम शहीद के नाम पर रखने जैसी घोषणाएं की गई थीं, लेकिन अब तक उन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया गया।
परिजनों ने जताई अपेक्षा
शहीद की मां सोमारो देवी और सेवानिवृत्त सीआरपीएफ जवान पिता शिवजी यादव का कहना है कि उस समय कई वादे किए गए थे, लेकिन समय के साथ अधिकांश पूरे नहीं हो सके। उनका कहना है कि परिवार को केवल शहीद की पत्नी के नाम पेट्रोल पंप आवंटित किया गया, जबकि अन्य घोषणाएं अभी भी लंबित हैं।
सरकार से की पहल की मांग
शहीद के भाई रविंद्र यादव और योगेंद्र यादव ने उम्मीद जताई कि सरकार शहीद से जुड़े अधूरे वादों को जल्द पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि शहीद अवनीश यादव का सर्वोच्च बलिदान आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
