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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मदरसों की एटीएस जांच पर राज्य सरकार से मांगा जवाब
प्रयागराज/लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के मदरसों की आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) से कराई जा रही जांच को लेकर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने निर्देश दिया है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि किन ठोस आधारों पर एटीएस को इन शिक्षण संस्थानों की जांच का आदेश दिया गया।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया तथा अन्य प्रबंध समितियों द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में आइजी एटीएस द्वारा 9 दिसंबर 2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें राज्य के मदरसों की जांच एटीएस से कराने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश के मदरसे उत्तर प्रदेश बोर्ड आफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 और वर्ष 2016 की नियमावली के तहत विधिसम्मत तरीके से संचालित हो रहे हैं। ऐसे में अचानक एटीएस जांच का आदेश देना उनके अधिकारों का उल्लंघन है। मदरसों की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने दलील दी कि यह आदेश पूरी तरह मनमाना और आधारहीन है। उन्होंने यह भी कहा कि एटीएस के 26 दिसंबर 2025 के मांग पत्र में विदेशी फंडिंग या किसी संदिग्ध गतिविधि का कोई ठोस उल्लेख नहीं है और बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस संदेह के इस प्रकार की कार्रवाई संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिका समय से पहले दायर की गई है और यह केवल एक सामान्य जांच है। सरकार का पक्ष है कि यदि जांच में कोई अनियमितता नहीं मिलती है तो रिपोर्ट में वही सामने आएगा, इसलिए इस पर आपत्ति का कोई कारण नहीं होना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने आदेश को मनमाना बताया है और वे स्वयं को कानूनी ढांचे के भीतर कार्यरत बता रहे हैं, ऐसे में राज्य सरकार के लिए यह आवश्यक है कि वह इस आदेश के पीछे के ठोस आधार को स्पष्ट करे। मामले की अगली सुनवाई 4 मई को निर्धारित की गई है।
