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सोनभद्र में 6000 बच्चे कुपोषित, सरकारी प्रयासों के बावजूद पोषण पुनर्वास केंद्र खाली

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सोनभद्र। कुपोषण के उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जिले के अफसरों की बेपरवाही के कारण यह अभियान प्रभावित हो रहा है। जिले में 6,000 से अधिक बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं। जिनमें से 700 से अधिक गंभीर तीव्र कुपोषण की स्थिति में हैं। इसके बावजूद जिला अस्पताल और दो सीएचसी के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के बेड खाली पड़े हैं।

जनपद सोनभद्र को नीति आयोग ने अति पिछड़े जिलों में शामिल किया है। इसके बाद भी कुपोषण की समस्या प्रमुख है। गरीबी और जागरूकता की कमी के कारण यहाँ के बच्चों में कुपोषण तेजी से बढ़ रहा है।

बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में छह हजार से अधिक बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में आते हैं। शासन ने ऐसे बच्चों को 14 दिनों तक एनआरसी में रखकर उनके स्वास्थ्य की निगरानी और उचित खान-पान की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं, ताकि उनकी सेहत में सुधार हो सके।

हालांकि, जिला अस्पताल और म्योरपुर व दुद्धी सीएचसी में स्थित एनआरसी की क्षमता बढ़ाए जाने के बावजूद, गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को इन केंद्रों पर भर्ती नहीं किया जा रहा है। रविवार को जिला अस्पताल के एनआरसी में सभी बेड खाली पाए गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि जिम्मेदारों की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के कारण जिले में कुपोषण उन्मूलन का लक्ष्य प्रभावित हो रहा है। जागरूकता और प्रभावी निगरानी से ही इस समस्या को हल किया जा सकता है, वरना कुपोषण का दंश यहाँ के बच्चों को यूं ही झेलना पड़ेगा।

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