सियासत
RG Kar पीड़िता की मां रत्ना देवनाथ बनीं जनता की आवाज
रत्ना देवनाथ ने बदला सियासी समीकरण
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में इस बार अप्रत्याशित तस्वीर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए 200 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 से 90 सीटों के बीच सिमटती नजर आई। इन नतीजों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा पानीहाटी विधानसभा सीट को लेकर रही, जहां आरजी कर रेप-हत्या मामले की पीड़िता की मां रत्ना देवनाथ ने (87977 वोट्स) चुनाव जीतकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
रत्ना देवनाथ ने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार तीर्थंकर घोष को 28,836 वोटों से पराजित किया। भाजपा (BJP) द्वारा दिया गया टिकट इस सीट पर निर्णायक साबित हुआ। उनकी जीत को राजनीतिक परिणाम के साथ-साथ भावनात्मक और प्रतीकात्मक रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि वे उस पीड़िता की मां हैं, जिसकी घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार शुरुआती चरण में मुकाबला कड़ा रहा और तृणमूल उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए थे, लेकिन मतगणना आगे बढ़ने के साथ रुझान बदल गया। आठवें राउंड तक रत्ना देवनाथ (Ratna Debnath) लगभग 20 हजार वोटों से आगे निकल गईं। इस सीट पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार भी मैदान में थे, लेकिन मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और तृणमूल के बीच ही सीमित रहा और अंततः जीत रत्ना देवनाथ के पक्ष में चली गई।
उनकी जीत के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। लोगों ने इसे उनकी बेटी को समर्पित जीत बताया और इसे उनके संघर्ष तथा धैर्य का परिणाम कहा। कई प्रतिक्रियाओं में यह भी सामने आया कि जनता ने उनके दर्द को समझा और बदलाव की इच्छा के चलते उन्हें समर्थन दिया। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए उसी का हिस्सा बनना जरूरी होता है और रत्ना देवनाथ ने वही कदम उठाया। साथ ही कई लोगों ने उम्मीद जताई कि उन्हें न्याय मिलेगा और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी।
यह चुनाव उस दर्दनाक घटना की पृष्ठभूमि में लड़ा गया, जो 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई थी। एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके बाद डॉक्टरों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुईं। मामले में एक आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, लेकिन पीड़िता का परिवार जांच से संतुष्ट नहीं था और अन्य लोगों की भूमिका पर लगातार सवाल उठाता रहा। यही मुद्दा आगे चलकर चुनाव में एक बड़ा कारक बन गया।
