भदोही
श्रीमद्भागवत में वैज्ञानिक सिद्धांतों की अवधारणा : पं. प्रमोद
भागवत कथा के तीसरे दिन दशावतार और क्रमिक विकास की अवधारणा पर हुई चर्चा
भदोही/रैमलपुर। क्षेत्रीय गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन पं. प्रमोद शास्त्री ने भगवान के दशावतार की अवधारणा को क्रमिक विकास के सिद्धांत से जोड़ते हुए कथा का सारगर्भित वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत में भगवान के 24 अवतारों का वर्णन मिलता है, जिनमें राम और कृष्ण प्रमुख अवतार माने जाते हैं।
दशावतारों के माध्यम से क्रमिक विकास की व्याख्या
पं. प्रमोद शास्त्री ने कहा कि मत्स्यावतार से जलचर, कच्छपावतार से जल-थलचर, वराहावतार से बड़े जीव और नृसिंह अवतार से आधे पशु-आधे मनुष्य की अवधारणा सामने आती है। इसके बाद वामन, परशुराम और रामावतार के माध्यम से मानव के क्रमिक विकास की व्याख्या की गई।
सृष्टि निर्माण से ध्रुव और प्रह्लाद चरित्र तक कथा
वैज्ञानिक सिद्धांतों को आधार बनाकर कथा करते हुए पं. प्रमोद शास्त्री ने सृष्टि निर्माण, कपिलोपाख्यान, ध्रुव चरित्र और प्रह्लाद चरित्र की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं और उन्हें अनुभव करने के लिए दृढ़ विश्वास तथा प्रबल प्रेम की आवश्यकता है।
श्रद्धालुओं ने किया आरती-पूजन
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आरती-पूजन किया और पं. प्रमोद शास्त्री से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर यजमान वीरेंद्र पाठक, संतोष पाठक, शैलेंद्र, विनोद, प्रमोद, नरेंद्र पाठक, संतलाल तिवारी, कैलाश दूबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और श्रोता मौजूद रहे।
