भदोही
धान की फसल में तना बेधक और पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप, कृषि विभाग ने किसानों को किया जागरूक
गांवों और खेतों में पहुंचकर अधिकारियों ने किया फसल का निरीक्षण, किसानों को बताए बचाव के उपाय
भदोही। जिलाधिकारी शैलेष कुमार के निर्देशन में जिले में धान की फसल को कीट एवं रोगों से सुरक्षित रखने के लिए कृषि विभाग की ओर से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत कृषि विभाग के अधिकारी और क्षेत्रीय कर्मचारी गांवों एवं खेतों में पहुंचकर किसानों को धान की फसल में लगने वाले प्रमुख कीटों तथा उनके नियंत्रण के उपायों की जानकारी दे रहे हैं।
अधिकारियों ने खेतों का किया निरीक्षण
इसी क्रम में उप कृषि निदेशक डॉ. राम प्रवेश और जिला कृषि अधिकारी इरम ने क्षेत्रीय कर्मचारियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर धान की फसल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने किसानों से संवाद कर कीट एवं रोगों की पहचान तथा उनकी रोकथाम के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
तना बेधक से पौधों को हो रहा नुकसान
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में धान की फसल में तना बेधक और पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप देखने को मिल रहा है। तना बेधक कीट की सूड़ियां पौधे के तने में प्रवेश कर अंदर से नुकसान पहुंचाती हैं। इससे पौधे की बढ़वार प्रभावित होती है और बालियां निकलने के समय सफेद दिखाई देने लगती हैं। इसे सामान्य तौर पर ‘डेड हार्ट’ और ‘व्हाइट ईयर’ के लक्षणों से पहचाना जा सकता है।
पत्ती लपेटक कीट की भी निगरानी जरूरी
पत्ती लपेटक कीट की सूड़ियां धान की पत्तियों को मोड़कर रोल के समान बना देती हैं और पत्तियों के हरे भाग को खाकर पौधे को नुकसान पहुंचाती हैं। कृषि अधिकारियों ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने तथा शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी।
तना बेधक कीट के नियंत्रण की बताई विधि
कृषि विभाग ने तना बेधक कीट के नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत + साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी का 250 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी है।
पत्ती लपेटक के लिए भी दी गई संस्तुति
पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण के लिए क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी 60 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रतिशत जीआर का चार किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करने की जानकारी दी गई।
फेरोमोन और सौर प्रकाश प्रपंच लगाने की सलाह
कीटों की निगरानी और नियंत्रण के लिए यांत्रिक उपायों के तहत किसानों को प्रति एकड़ 8 से 10 फेरोमोन प्रपंच अथवा 2 से 5 सौर प्रकाश प्रपंच लगाने की सलाह दी गई है। इससे खेतों में कीटों की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिल सकेगी।
बिना विशेषज्ञ की सलाह रसायनों का प्रयोग न करें
उप कृषि निदेशक ने क्षेत्रीय कर्मचारियों को लगातार भ्रमण कर धान की फसल का सर्वेक्षण करने और कीट एवं रोगों के प्रकोप की स्थिति में किसानों को तत्काल आवश्यक जानकारी व तकनीकी मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए। किसानों से भी अपील की गई कि फसल में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर बिना विशेषज्ञ की सलाह के रसायनों का प्रयोग न करें और कृषि विभाग की संस्तुतियों के अनुसार ही नियंत्रण के उपाय अपनाएं।
फसल सुरक्षा के लिए लगातार चल रहा अभियान
कृषि विभाग के अनुसार, जिलाधिकारी के निर्देशन में चलाया जा रहा यह अभियान किसानों को समय रहते फसल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने, उत्पादन एवं उत्पादकता बनाए रखने तथा वैज्ञानिक एवं समन्वित कीट प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार संचालित किया जा रहा है।
