गाजीपुर
जानलेवा साबित हो रहे हैं आवारा कुत्ते, बहरियाबाद क्षेत्र में दहशत का माहौल
झुंड बनाकर भेड़-बकरियों पर कर रहे हमला
बहरियाबाद (गाजीपुर)। बहरियाबाद एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। ग्रामीण भय के साए में जीने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि आवारा कुत्ते झुंड बनाकर घूम रहे हैं और भेड़-बकरियों पर हमला कर उन्हें काटकर लहूलुहान कर दे रहे हैं। इससे पशुपालकों को भी भारी चिंता का सामना करना पड़ रहा है।
बढ़ती संख्या और हिंसक व्यवहार से बढ़ी चिंता
क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हिंसक व्यवहार से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। गली-मोहल्लों और सड़कों पर कुत्तों के झुंड घूमते दिखाई दे रहे हैं। खासकर बच्चे अकेले आने-जाने से डर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस समस्या का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
कुत्तों के काटने से रेबीज का खतरा
आवारा कुत्तों के काटने से रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। कुत्तों के हमलों को लेकर ग्रामीणों में दहशत है और लोग प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में रेबीज से होने वाली मौतों का एक बड़ा हिस्सा कुत्तों के काटने से जुड़ा हुआ है।
सड़कों पर अचानक आने से दुर्घटनाओं का भी खतरा
आवारा कुत्ते कई बार रात के समय या तेज गति से चल रहे वाहनों के सामने अचानक आ जाते हैं। कई बार वे वाहनों का पीछा भी करते हैं, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के सामने दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। कुत्तों से बचने के प्रयास में वाहन चालक गिर सकते हैं या दूसरे वाहन से टकरा सकते हैं।
नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने की जरूरत
पशु जन्म नियंत्रण नियमों के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण की व्यवस्था की जाती है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में इन कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है। कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नियमित और योजनाबद्ध अभियान चलाने की मांग की जा रही है।
खुले में पड़ा कूड़ा बन रहा भोजन का बड़ा स्रोत
गांवों और कस्बों में खुले में पड़ा कूड़ा-करकट आवारा कुत्तों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत बन जाता है। इससे वे बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं। पालतू कुत्तों को पालने के बाद सड़कों पर छोड़ देना भी आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने का एक कारण है। ग्रामीणों ने कचरे को खुले में फेंकने से रोकने और कूड़ेदानों के सही उपयोग को बढ़ावा देने की जरूरत बताई है।
सभी के संयुक्त प्रयास से निकलेगा समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए प्रशासन, स्थानीय निकाय, पशुपालन विभाग, पशु कल्याण संगठनों और आम नागरिकों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। नसबंदी, टीकाकरण, कचरा प्रबंधन और जनजागरूकता अभियान के जरिए आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
