भदोही
मानसून में बढ़ा सर्पदंश का खतरा, ढाई माह में 116 लोग बने शिकार
कॉमन करैत सबसे खतरनाक, जिले के अस्पतालों में 2,000 एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन उपलब्ध
स्वास्थ्य विभाग ने समय पर अस्पताल पहुंचने की दी सलाह, झाड़-फूंक से बचने की अपील
ज्ञानपुर। मानसून के दौरान लगातार हो रही बारिश से जिले में सर्पदंश की घटनाओं में तेजी आई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले ढाई माह में 116 लोगों को सांप ने काटा, जबकि इस अवधि में महिला समेत कई लोगों की सर्पदंश से मौत भी हो चुकी है। बारिश के कारण बिलों में पानी भरने से जहरीले सांप रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।
कॉमन करैत बना सबसे बड़ा खतरा
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात के मौसम में कॉमन करैत सबसे अधिक खतरनाक साबित होता है। इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है क्योंकि यह प्रायः रात में फर्श या बिस्तर पर सो रहे लोगों को बिना आहट डस लेता है। इसके काटने पर शुरुआती समय में न दर्द होता है और न ही सूजन, जिससे लोग इसकी गंभीरता को समय पर समझ नहीं पाते।
समय पर इलाज से बच सकती है जान
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक ने बताया कि सर्पदंश के बाद शुरुआती तीन से चार घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि मरीज को समय रहते सरकारी अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो अधिकांश मामलों में उसकी जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि जिले में करीब 2,000 एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन उपलब्ध हैं। महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय, महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल, सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय सहित सभी सीएचसी और पीएचसी पर इसकी पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
बरसात में बरतें विशेष सावधानी
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) विवेक कुमार ने बताया कि बारिश के दौरान सांप भोजन की तलाश में घरों, बेसमेंट, स्टोर रूम, रसोई, जूतों और सोफों के नीचे तक पहुंच जाते हैं। उन्होंने लोगों से घर के आसपास साफ-सफाई रखने, झाड़ियां हटाने, चूहों पर नियंत्रण रखने, रात में टॉर्च का उपयोग करने, ऊंचे बिस्तर पर सोने और जूते पहनने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांचने की सलाह दी।
झाड़-फूंक नहीं, अस्पताल पहुंचाना है जरूरी
महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. अजय कुमार ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो घबराने के बजाय मरीज को शांत रखें, प्रभावित अंग को कम से कम हिलाएं और अंगूठी, कड़ा या घड़ी जैसी वस्तुएं तुरंत हटा दें। उन्होंने कहा कि बिना समय गंवाए मरीज को निकटतम सरकारी अस्पताल पहुंचाएं। उन्होंने लोगों को घाव पर चीरा लगाने, मुंह से जहर चूसने या झाड़-फूंक जैसे घरेलू उपायों से बचने की सलाह देते हुए कहा कि एंटी स्नेक वेनम ही सर्पदंश का प्रभावी उपचार है।
