गाजीपुर
हीटवेव का कहर: आसमान से बरस रही आग, घरों में कैद होने को मजबूर लोग
भीषण गर्मी से जनजीवन अस्त-व्यस्त, पशु-पक्षी भी बेहाल
लू, डिहाइड्रेशन और त्वचा रोगों का बढ़ा खतरा, विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह
बहरियाबाद (गाजीपुर)। क्षेत्र में इन दिनों भीषण गर्मी और हीटवेव (लू) का प्रकोप लगातार जारी है। आसमान से बरसती आग और तेज धूप ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लोग आवश्यक कार्यों को सुबह के समय ही निपटाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि दोपहर के समय सड़कें लगभग सूनी नजर आ रही हैं।
भीषण गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मौसम की बेरुखी से हर वर्ग परेशान है और लोग घरों में रहने को मजबूर हो गए हैं।
लापरवाही पड़ सकती है भारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक तापमान के कारण शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम प्रभावित हो सकता है। ऐसे में लू लगने, डिहाइड्रेशन और अन्य गर्मी जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
लू लगने के प्रमुख लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, त्वचा का लाल और सूखा होना, अत्यधिक कमजोरी तथा बेहोशी शामिल हैं। वहीं शरीर से अत्यधिक पानी और नमक निकल जाने पर थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
घमौरियों और त्वचा रोगों की बढ़ी समस्या
तेज गर्मी और लगातार पसीना आने के कारण लोगों को घमौरियों की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। त्वचा पर लाल दाने, खुजली और जलन की शिकायतें बढ़ रही हैं। इसके अलावा शरीर में पानी की कमी होने पर चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना और गाढ़े रंग का पेशाब आना जैसे लक्षण भी सामने आ रहे हैं।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी और लू से बचाव के लिए नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है। प्यास न लगने पर भी समय-समय पर पानी का सेवन करते रहना चाहिए।
नींबू पानी, ओआरएस घोल, छाछ, लस्सी, नारियल पानी और कच्चे आम का पन्ना जैसे पेय पदार्थ शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
खानपान पर भी दें विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मौसम में भारी, तले-भुने और मसालेदार भोजन से बचने की सलाह दी है। इसके बजाय तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी तथा अन्य मौसमी फलों का सेवन अधिक करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सावधानी, संतुलित आहार और पर्याप्त जल सेवन के माध्यम से ही हीटवेव के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
