गाजीपुर
भीषण गर्मी से धान की नर्सरी पर संकट, बुवाई को लेकर चिंतित किसान
बढ़ते तापमान और महंगी होती खेती ने बढ़ाई मुश्किलें, नर्सरी डालने से कतरा रहे कृषक
पानी की कमी, खादों की महंगाई और बारिश में देरी से धान उत्पादन पर मंडराया खतरा
बहरियाबाद (गाजीपुर)। बहरियाबाद एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के चलते किसान धान की नर्सरी तैयार करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। लगातार बढ़ते तापमान और सिंचाई संसाधनों की कमी के कारण किसान नर्सरी डालने से कतरा रहे हैं। वहीं खेती की बढ़ती लागत ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
क्षेत्र में इन दिनों तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच रहा है। ऐसे में धान के बीजों का अंकुरण प्रभावित हो रहा है और छोटे पौधों के सूखने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि पर्याप्त पानी की व्यवस्था न होने के कारण नर्सरी तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
महंगी खादों ने बढ़ाई किसानों की परेशानी
किसानों के अनुसार डीएपी और मिश्रित उर्वरकों के दाम बढ़ने तथा बाजार में उनकी उपलब्धता कम होने से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। इससे धान की खेती किसानों के लिए आर्थिक रूप से बोझिल होती जा रही है।
कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) का उपयोग किया जा सकता है। यह अपेक्षाकृत सस्ता होने के साथ-साथ फॉस्फोरस, सल्फर और कैल्शियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी उपलब्ध कराता है, जो जड़ों के विकास और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
नर्सरी को गर्मी से बचाने के लिए अपनाएं सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाए तो नर्सरी में सिंचाई शाम या रात के समय करनी चाहिए। सुबह होने तक अतिरिक्त पानी खेत से निकाल देना चाहिए, क्योंकि दिन में गर्म पानी पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।
नर्सरी में जिंक की कमी से बचाव के लिए 21 या 33 प्रतिशत जिंक सल्फेट को सूखी बालू के साथ मिलाकर प्रयोग करने की सलाह दी गई है। इससे पौधों के पीलेपन की समस्या कम होती है और उनका विकास बेहतर होता है।
जैविक खाद के विकल्प तलाश रहे किसान
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़ी हुई गोबर की खाद की कमी भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में सरसों की खली का चूरा मिट्टी में मिलाकर जैविक पोषण की पूर्ति की जा सकती है। यह नाइट्रोजन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है।
बारिश में देरी से बढ़ी चिंता
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं तो किसानों को लंबी अवधि वाली धान की किस्मों की नर्सरी डालने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। समय पर मानसून न आने और भीषण गर्मी के कारण धान की खेती को लेकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अब मानसून की पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि धान की नर्सरी तैयार करने का कार्य सुचारु रूप से शुरू किया जा सके।
