वाराणसी
Kashi Vishwanath Temple : अर्चकों के लिए नियमावली लागू, अनुबंध की शर्तों पर बना संशय!
वाराणसी। काशी विश्वनाथ की सेवा में लगे पुजारियों को सम्मानजनक वेतन, भत्ता और अन्य सेवा-सुविधाओं के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने करीब चार दशक बाद सेवा नियमावली लागू तो कर दी है, लेकिन उसके अनुपालन की प्रक्रिया बेहद धीमी बनी हुई है। वर्तमान में कार्यरत अर्चकों को नियमित करने के लिए अब तक केवल कमेटी का गठन ही हो सका है। इसकी बैठक कब होगी, इसे लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। वहीं, अनुबंध की शर्तों को लेकर अर्चकों में खास उत्साह नहीं दिख रहा है।
सरकार-नियंत्रित देवालयों में सेवादारों और कर्मचारियों के वेतन की समीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मंदिरों के पुजारियों की ‘अनदेखी’ का मुद्दा उठाया गया है। इसमें श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का भी उदाहरण दिया गया है, जिससे यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में गर्भगृह सहित अन्य विग्रहों के राग-भोग और दर्शन-पूजन की व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखने के उद्देश्य से प्रदेश शासन ने वर्ष 1983 में मंदिर का अधिग्रहण किया था। इसके बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि अर्चकों की सेवा व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन चार दशक बीत जाने के बावजूद सेवा नियमावली नहीं बन पाने से नियुक्ति, वेतनमान और सेवा निवृत्ति के बाद मिलने वाली राशि को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
इस समस्या के समाधान के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन हर बार यह कवायद कार्यवृत्त की फाइलों तक सीमित रह गई। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के नव्य-भव्य स्वरूप के बाद 22 मार्च 2022 को आयोजित पहली (102वीं) बैठक में सेवा नियमावली का प्रारूप तैयार करने के लिए 16 सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इसमें न्यास सदस्यों के साथ वित्त एवं लेखा विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया था। बैठक की अध्यक्षता कर रहे न्यास अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने समिति को एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने में दो वर्ष लग गए।
इसके बाद नौ फरवरी 2024 को न्यास की 105वीं बैठक में सेवा नियमावली पर चर्चा हो सकी। बैठक में पुजारियों को राज्यकर्मी का दर्जा देकर उसी अनुरूप सुविधाएं प्रदान करने पर सहमति बनी। शासन स्तर पर औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सितंबर 2025 में न्यास की 108वीं बैठक में सेवा नियमावली लागू करने को मंजूरी दी गई। अनुबंध का 15 पेज का प्रारूप भी तैयार किया गया, लेकिन सेवारत पुजारियों और अर्चकों की इस पर सहमति नहीं बन सकी।
इसी वर्ष फरवरी में न्यास परिषद की 109वीं बैठक में पहले से कार्यरत पुजारियों को नियमित करने के लिए मूल्यांकन आदि की प्रक्रिया हेतु संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया। यह कमेटी अब जाकर गठित हो पाई है। ऐसे में पुजारियों को उचित वेतन और अन्य सुविधाएं मिलने की उम्मीदें अभी भी पूरी होती नजर नहीं आ रही हैं। सेवा नियमावली लागू होने के बावजूद श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास को पुजारियों की सेवा स्थिति में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता बनी हुई है।
