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वाराणसी

आकांक्षा दुबे मौत मामले पर वाराणसी पुलिस को इलाहाबाद हाई कोर्ट की चेतावनी

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वाराणसी। भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की वाराणसी में संदिग्ध मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी पुलिस को हलफनामा दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने इस मामले की सीबीआइ जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस कमिश्नर वाराणसी और थानाध्यक्ष सारनाथ को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई तिथि 22 मई को अपना जवाबी हलफनामा प्रस्तुत करें। यदि ऐसा नहीं किया गया तो अगली सुनवाई में सुबह 10 बजे दोनों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा।

कोर्ट ने पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल को यह भी निर्देशित किया है कि वह सुनिश्चित करें कि थानाध्यक्ष द्वारा हलफनामा दाखिल किया जाए। मामले में आरोपित समर सिंह और संजय सिंह को भी कोर्ट ने 48 घंटे के भीतर नोटिस जारी करने का निर्देश याचिकाकर्ता को दिया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सौरभ तिवारी के मुताबिक, कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगली सुनवाई में इस मामले को सूची में सबसे ऊपर रखा जाएगा।

इससे पहले चार मई को कोर्ट ने इस प्रकरण में आदेश सुरक्षित रख लिया था। मामले से जुड़े संक्षिप्त तथ्यों के अनुसार, 26 मार्च 2023 को वाराणसी के सारनाथ स्थित एक होटल में आकांक्षा दुबे का शव मिला था। उनकी मां मधु दुबे (याची) ने स्थानीय पुलिस की जांच पर अविश्वास जताते हुए मामले की सीबीआइ जांच की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है। याची का आरोप है कि स्थानीय पुलिस आरोपितों को बचाने का प्रयास कर रही है और जांच की दिशा को प्रभावित किया गया है।

मधु दुबे ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की हत्या करने के बाद उसे दुपट्टे के सहारे लटकाकर बिस्तर पर बैठा दिया गया, ताकि मामला आत्महत्या का प्रतीत हो सके। इस मामले में न्यायालय ने पुलिस कमिश्नर और सारनाथ थानाध्यक्ष को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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आकांक्षा दुबे की मौत के बाद भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मची हुई है। उनके प्रशंसक और परिवार के सदस्य लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। मामले में सीबीआइ जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्थानीय पुलिस मामले की गंभीरता को समझने में विफल रही है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस निर्धारित समय के भीतर हलफनामा दाखिल नहीं करती है, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। यह आदेश इस बात का संकेत माना जा रहा है कि न्यायालय इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं करेगा। आकांक्षा दुबे की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर उनके परिवार और प्रशंसकों के बीच गहरी चिंता बनी हुई है। मामले में सीबीआइ जांच की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी पुलिस को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है, जिससे यह साफ होता है कि न्यायालय इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगली सुनवाई में पुलिस की कार्रवाई और हलफनामा इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा। आकांक्षा दुबे की मौत का मामला न केवल उनके परिवार बल्कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी बड़ा सदमा बना हुआ है। अब सभी की निगाहें इस मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं और न्याय की उम्मीद की जा रही है।

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