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वाराणसी

पीएनजी-सीएनजी बना कारोबारियों का सहारा, उपभोक्ताओं की जेब पर अब भी बोझ

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वाराणसी। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने जहां कई नई समस्याएं खड़ी की हैं, वहीं कुछ वैकल्पिक समाधान के रास्ते भी खोले हैं। इस संघर्ष में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल न होने वाले देशों को भी विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें सबसे अधिक असर ऊर्जा क्षेत्र पर देखने को मिल रहा है।

शहरों से लेकर गांवों तक लोग वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी क्रम में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) और सीएनजी ने खासकर व्यापारिक क्षेत्र को राहत देने का काम किया है। हालांकि इसके बावजूद आम उपभोक्ताओं को महंगाई से कोई विशेष राहत नहीं मिल पा रही है।

गेल के अनुसार, जनपद में प्रतिदिन करीब 3000 एलपीजी सिलिंडरों की बचत हो रही है। 3071 रुपये प्रति कमर्शियल सिलिंडर के हिसाब से यह बचत लगभग 92 लाख रुपये प्रतिमाह और सालाना 11 करोड़ रुपये से अधिक बैठती है। वहीं जिले में रोजाना 1.5 लाख किलोग्राम सीएनजी की खपत 88.67 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से लगभग 1.33 करोड़ रुपये प्रतिदिन होती है।

यदि यही ऊर्जा पेट्रोल से पूरी की जाती, जिसकी कीमत 95.55 रुपये प्रति लीटर है, तो दो लाख लीटर पेट्रोल पर प्रतिदिन लगभग 1.91 करोड़ रुपये खर्च होते। इस तरह प्रतिदिन करीब 58 लाख रुपये और सालाना लगभग 212 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। कुल मिलाकर पीएनजी और सीएनजी के माध्यम से करीब 223 करोड़ रुपये की बचत दर्ज की जा रही है।

गेल के महाप्रबंधक सुशील कुमार ने बताया कि इस अंतर की वजह से ईंधन खर्च में करीब 40 प्रतिशत तक की कमी आई है। इससे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक इकाइयों को काफी राहत मिली है। हालांकि, इस बचत के बावजूद आम लोगों को महंगाई से राहत नहीं मिल रही है। आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच ऊर्जा के इस वैकल्पिक स्रोत से होने वाली बचत का लाभ आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहा है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस बचत को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था करे, तो इससे महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल यह लाभ मुख्य रूप से व्यापारियों और बड़े व्यवसायों तक सीमित है, जबकि आम जनता की परेशानियां जस की तस बनी हुई हैं। ऐसे में सरकार को ऊर्जा के इस वैकल्पिक स्रोत का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इसके लिए उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा और व्यापारियों को भी उपभोक्ताओं तक इस बचत का लाभ पहुंचाने के लिए प्रेरित करना होगा।

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