वाराणसी
वाराणसी कचहरी विस्थापन का विरोध, पीएम मोदी को कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने लिखा पत्र
राघवेन्द्र चौबे बोले- कचहरी का विस्तारीकरण हो, विस्थापन नहीं
वाराणसी। कचहरी को उसके वर्तमान स्थान से अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की चर्चाओं और प्रस्तावों का विरोध करते हुए कांग्रेस महानगर अध्यक्ष एवं अधिवक्ता राघवेन्द्र चौबे ने प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विस्तृत पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि वाराणसी कचहरी केवल न्यायालय परिसर भर नहीं है, बल्कि पूर्वांचल के लाखों लोगों की न्यायिक आस्था, सामाजिक विश्वास, प्रशासनिक समन्वय और लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रमुख केंद्र है।
राघवेन्द्र चौबे ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि वर्तमान समय में वाराणसी कचहरी परिसर में स्थानाभाव की गंभीर समस्या बनी हुई है, जिससे अधिवक्ताओं, वादकारियों और न्यायिक कार्यों के संचालन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान कचहरी को शहर से दूर स्थानांतरित करना नहीं, बल्कि मौजूदा परिसर का योजनाबद्ध विस्तार करना है। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि कचहरी विस्तार हेतु वर्तमान परिसर से सटी बनारस क्लब की भूमि उपलब्ध कराई जाए, जो सबसे उपयुक्त, व्यावहारिक और जनहित में बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि बनारस क्लब को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जा सकता है, लेकिन कचहरी को उसके मूल न्यायिक क्षेत्र से हटाना न्याय व्यवस्था और आम जनता दोनों के हितों के खिलाफ होगा। काशी की ऐतिहासिक कचहरी वर्षों से शहर के केंद्र में विकसित हुई है, जहां प्रतिदिन हजारों लोग न्यायिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि इसे शहर से दूर स्थानांतरित किया गया तो गरीब, ग्रामीण, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, दिव्यांगजन और दूर-दराज से आने वाले वादकारी सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इससे न्याय प्राप्त करना महंगा, जटिल और आम जनता की पहुंच से दूर होता चला जाएगा।
राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि अधिवक्ता समाज और समस्त काशीवासियों की स्पष्ट भावना है कि कचहरी का “विस्तारीकरण” किया जाए, “विस्थापन” नहीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रस्ताव के विरोध में अधिवक्ता समाज पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है और भविष्य में भी इस निर्णय को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। यह केवल अधिवक्ताओं का आंदोलन नहीं, बल्कि काशी की जनता की सामूहिक आवाज है, जो अपनी ऐतिहासिक न्यायिक व्यवस्था, जनसुविधा और शहर की मूल संरचना को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि बनारस ने लगातार तीन बार स्थानीय नेतृत्व से ऊपर उठकर उन्हें अपना सांसद चुना है। ऐसे में काशी की जनता और अधिवक्ता समाज की भावनाओं की रक्षा करना उनकी नैतिक और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी भी है। प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ वह काशी के जनप्रतिनिधि भी हैं, इसलिए उन्हें इस विषय को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को जनभावनाओं के अनुरूप निर्णय लेने के लिए निर्देशित करना चाहिए।
राघवेन्द्र चौबे ने अपने मांग पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, मंडलायुक्त वाराणसी और जिलाधिकारी वाराणसी को भी प्रेषित करते हुए मांग की कि अधिवक्ता समाज और आम जनता की भावनाओं का सम्मान किया जाए तथा वाराणसी कचहरी विस्थापन के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अधिवक्ताओं और काशीवासियों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है तथा न्यायिक व्यवस्था, जनसुविधा और काशी की ऐतिहासिक पहचान के संरक्षण के लिए हर लोकतांत्रिक संघर्ष में सहभागी बनेगी। कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक सिंह, अधिवक्ता लोकेश सिंह और अधिवक्ता वीरेंद्र पंडित ने महानगर अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे द्वारा लिखे गए समर्थन पत्र को सेंट्रल बार एसोसिएशन तथा बनारस बार एसोसिएशन के सम्मानित अध्यक्षों को सौंपकर अधिवक्ता समाज के आंदोलन को समर्थन दिया।
