वाराणसी
काशी के रिहायशी इलाकों में जिस्मफरोशी का जाल: फ्लैट बने अवैध धंधे के नए केंद्र
वाराणसी। जनपद में होटल और गेस्ट हाउसों पर पुलिस की बढ़ती सख्ती के बाद, देह व्यापार के सिंडिकेट ने अपना ठिकाना बदल लिया है। अब शहर के पॉश इलाकों में स्थित रिहायशी फ्लैट इस काले कारोबार के नए ठिकाने बन गए हैं।
रणनीति में बदलाव: होटल से फ्लैट तक का सफर
पुलिस की छापेमारी से बचने के लिए जिस्म के सौदागरों ने अब अधिक सुरक्षित और गुप्त रास्तों का चयन किया है।
किराए के फ्लैट: शहर के भीड़भाड़ वाले और पॉश इलाकों में ऊंचे दामों पर फ्लैट किराए पर लेकर उन्हें देह व्यापार के अड्डों में तब्दील किया जा रहा है।
डिजिटल नेटवर्क: ग्राहकों को फांसने के लिए अब सोशल मीडिया, मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लिया जा रहा है।
गोपनीयता: बाहर से सामान्य दिखने वाले इन घरों के अंदर दिन-रात सौदेबाजी का खेल चल रहा है, जिससे पड़ोसियों को भी शुरुआत में भनक नहीं लगती।
मजबूरी और लालच का खेल: युवतियों की व्यथा
इस संगठित अपराध के पीछे युवतियों के शोषण की एक दर्दनाक कहानी छिपी है। जांच में सामने आए कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
1. भ्रामक वादे
बड़ी संख्या में युवतियों को, विशेषकर पश्चिम बंगाल से, बेहतर नौकरी, शादी या सुखद भविष्य का झांसा देकर वाराणसी लाया जाता है।
2. पहचान की चोरी
एक बार इस जाल में फंसने के बाद, दलाल युवतियों के पहचान पत्र (ID) और जरूरी दस्तावेज छीन लेते हैं, ताकि वे पुलिस की मदद न ले सकें और भाग न पाएं।
3. जबरन देह व्यापार
डर, दबाव और पैसों के लालच के माध्यम से इन युवतियों को ऐसे दलदल में धकेल दिया जाता है, जहां से वापसी का रास्ता लगभग बंद हो जाता है।
स्थानीय निवासियों में आक्रोश और पुलिस की भूमिका
रिहायशी इलाकों में बढ़ रही इन गतिविधियों ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है। ” एक स्थानीय निवासी ने बताया कि, अजनबी लोगों का देर रात तक आना-जाना और संदिग्ध हलचल से मोहल्ले का सामाजिक परिवेश खराब हो रहा है। शिकायत के बावजूद कार्रवाई की गति धीमी है।”
वहीं शहर के परेड कोठी क्षेत्र के आसपास स्थित कुछ होटलों में नियमों की अनदेखी कर बिना पहचान पत्र के कमरों का आवंटन किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, इन होटलों में कमरे घंटे के हिसाब से उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे देह व्यापार का धंधा खूब फल-फूल रहा है।
बताया जा रहा है कि केवल परेड कोठी ही नहीं, बल्कि शहर के विभिन्न कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आसपास स्थित कुछ होटल्स भी इस तरह का गंदा धंधा चला रहे हैं। यहां आने वाले लोगों से न तो वैध पहचान पत्र मांगा जा रहा है और न ही किसी प्रकार का रिकॉर्ड ठीक से रखा जा रहा है। परेड कोठी क्षेत्र अंतर्गत एक मेडिकल स्टोर वाले ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, अब केवल युवक ही नहीं, बल्कि युवतियां भी खुले तौर पर निरोध (कंडोम) की खरीदारी कर रही हैं। उनके अनुसार, पहले जहां इस तरह की खरीद में संकोच देखा जाता था, वहीं अब इसमें काफी खुलापन आ गया है।
