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वाराणसी

ब्राह्मण समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करे सरकार, ट्रंप को उपचार की आवश्यकता : शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती

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वाराणसी। काशी में सुमेरू पीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती की अध्यक्षता में सोमवार को संतों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संत शामिल हुए। बैठक के दौरान ब्राह्मण समाज की सुरक्षा को लेकर सरकार से मांग उठाई गई, वहीं भगवान परशुराम का विधिवत पूजन भी किया गया।

बैठक के उपरांत शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सरकार सवर्ण और दलित वर्गों के बीच टकराव की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रही है, जिसे उन्होंने अनुचित बताया। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने की बात भी कही। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्धों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे तेल और गैस संकट गहरा रहा है और ऐसे संघर्षों को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उनका मानसिक संतुलन बिगड़ चुका है और उन्हें उपचार की आवश्यकता है।

शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि आयोजित विशेष पूजन भगवान परशुराम को समर्पित था। उन्होंने कहा कि यह अनुष्ठान कल्पसूत्र, परशुराम तंत्र सहित विभिन्न ग्रंथों के आधार पर प्रातः 4 बजे से 7 बजे तक कुमकुम, अक्षत, केसर और 10 हजार पुष्पों से किया गया। इसका उद्देश्य राष्ट्र की समृद्धि, एकता और समाज में सम्मान व सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करना था।

सामाजिक और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य पर उन्होंने कहा कि देश में सभी वर्गों के बीच एकता आवश्यक है। समान शिक्षा नीति, समान नागरिक संहिता, समान जनसंख्या नीति और समान न्याय व्यवस्था लागू करने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि इससे समाज में विभाजन की स्थिति समाप्त हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में बड़ी संख्या में ब्राह्मण हैं और यदि वे एकजुट होकर भगवान परशुराम को आधार मानें तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सवर्ण और दलित वर्गों के बीच मतभेद बढ़ाने का कार्य कर रही है, जिसे बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने समान आरक्षण और समान न्याय व्यवस्था की भी मांग रखी।

वैश्विक तनाव और युद्धों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है और न ही भविष्य में होगा। उन्होंने अमेरिका सहित बड़ी शक्तियों से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की और कहा कि विश्व में स्थायी समाधान केवल शांति से ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक संघर्षों के पीछे बड़ी शक्तियों की नीतियां जिम्मेदार हैं और तेल संसाधनों को लेकर हो रहे विवाद इसका एक कारण हैं। उन्होंने अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विश्व में आतंकवाद को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका प्रमुख रही है।

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पश्चिम बंगाल की राजनीति और चुनाव को लेकर पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि समय के अनुसार बदलाव आवश्यक होता है और जहां जरूरत हो, वहां परिवर्तन होना चाहिए। अंतिम निर्णय को उन्होंने ईश्वर की इच्छा पर निर्भर बताया।

महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन संसद और विधानसभाओं में आरक्षण की आवश्यकता पर उन्होंने सवाल खड़े किए। उनका मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए अलग व्यवस्थाएं बनाई जानी चाहिए।

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