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वाराणसी

शुष्क पछुआ हवाओं से बढ़ी तपिश, लू का दौर शुरू

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वाराणसी। पूर्वांचल के अधिकांश जिलों समेत वाराणसी में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में लू का असर शुरू हो गया है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि आगामी दो महीनों तक भीषण गर्मी का दौर जारी रहेगा और इसके बाद ही मानसून के आगमन की संभावना बनेगी।

शुक्रवार की सुबह से ही गर्मी का प्रभाव स्पष्ट नजर आया। सुबह के समय ठंडक का असर लगभग समाप्त हो गया और दिन चढ़ने के साथ तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। सुबह करीब 11 बजे ही लोगों को तेज धूप और पसीने के साथ गर्मी की तीव्रता का अनुभव होने लगा। अनुमान है कि अब अगले दो माह तक लू और गर्म हवाओं का असर बना रहेगा।

मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों में अधिकतम तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.7 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 23.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.1 डिग्री अधिक है। इस अवधि में आर्द्रता न्यूनतम 18 प्रतिशत और अधिकतम 71 प्रतिशत दर्ज की गई। आर्द्रता में कमी के कारण मौसम शुष्क बना हुआ है, हालांकि पश्चिमी दिशा में बादलों की हल्की सक्रियता देखी जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि पछुआ हवाओं के प्रभाव से हल्के बादल आ सकते हैं, लेकिन वर्षा की संभावना कम है।

प्रदेश में शुष्क मौसम के चलते तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। बीते 14 वर्षों में पहली बार अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही तापमान 40 डिग्री के पार पहुंचा है। बुधवार को तापमान 42.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचकर 14 वर्षों का रिकॉर्ड भी टूट चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इससे पहले वर्ष 2012 में चार अप्रैल को अधिकतम तापमान 42 डिग्री दर्ज किया गया था, जबकि वर्ष 2010 में एक अप्रैल को तापमान 46.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था, जो अब तक अप्रैल का सर्वाधिक रिकॉर्ड है। पिछले वर्षों में सामान्यतः 16 अप्रैल के बाद ही तापमान 40 डिग्री के पार जाता रहा है।

बीते गुरुवार को तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई। बीएचयू क्षेत्र में अधिकतम तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.5 डिग्री अधिक है, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 0.2 डिग्री अधिक दर्ज किया गया। बाबतपुर एयरपोर्ट क्षेत्र में अधिकतम तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस रहा और न्यूनतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.9 डिग्री कम है। यहां आर्द्रता घटकर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के लखनऊ स्थित आंचलिक केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार अगले 2 से 3 दिनों तक प्रदेश में कोई सक्रिय मौसम प्रणाली नहीं रहने के कारण शुष्क पछुआ हवाएं चलती रहेंगी। कर्नाटक और महाराष्ट्र क्षेत्र में बने प्रतिचक्रवात के मध्य भारत की ओर बढ़ने से तापमान में मामूली वृद्धि होने की संभावना है। वहीं बीएचयू के मौसम विज्ञानी प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि तापमान धीरे-धीरे और बढ़ेगा तथा आने वाले दिनों में भी प्रचंड गर्मी बनी रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव इस क्षेत्र पर नहीं पड़ेगा।

मौसम के मौजूदा रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि प्री-मानसून गतिविधियां सवा माह बाद सक्रिय होंगी और इसके पश्चात मानसून समय पर पहुंचा तो लगभग दो महीने बाद पूर्वांचल में दस्तक देगा।

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