गोरखपुर
हरनही के गहना ग्राम में श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य रसपान
भक्ति, ज्ञान और भावनाओं का अद्भुत संगम
गोरखपुर। जिले के खजनी थाना क्षेत्र अंतर्गत हरनही के गहना ग्राम में इन दिनों आध्यात्मिक वातावरण अपनी चरम सीमा पर है, जहां श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य आयोजन पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हो रहा है। गांव का प्रत्येक कोना भक्ति रस में सराबोर है और श्रद्धालु जन बड़ी संख्या में कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं।
इस पावन कथा का वाचन श्रीधाम वृन्दावन से पधारे परम पूज्य कथा व्यास पंडित श्री नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज द्वारा किया जा रहा है। उनके श्रीमुख से निकलने वाले प्रत्येक शब्द श्रोताओं के हृदय को स्पर्श कर उन्हें भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की ओर प्रेरित कर रहे हैं। कथा के मुख्य यजमान श्री प्रेमचंद तिवारी, उनकी धर्मपत्नी, समस्त तिवारी परिवार, मित्रगण एवं क्षेत्रीय श्रद्धालु इस आयोजन को सफल बनाने में तन, मन और धन से समर्पित भाव से लगे हुए हैं।

कथा के चौथे दिवस का आयोजन विशेष रूप से भावविभोर कर देने वाला रहा। इस दिन महाराज श्री ने श्री जड़भरत जी की पावन कथा का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार जड़भरत जी ने संसारिक मोह-माया से दूर रहकर आत्मज्ञान की प्राप्ति की और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझाया। उनके जीवन प्रसंग ने श्रोताओं को गहराई से सोचने पर विवश कर दिया।
इसके पश्चात अजामिल की कथा का भी अत्यंत प्रभावशाली वर्णन किया गया। महाराज श्री ने बताया कि कैसे एक पापी व्यक्ति भी सच्चे भाव से भगवान का स्मरण कर मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। अजामिल की कथा ने यह संदेश दिया कि भगवान की कृपा असीम है और सच्चे मन से किया गया स्मरण कभी व्यर्थ नहीं जाता। कथा सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
पूरे आयोजन स्थल पर भक्ति गीतों, मंत्रोच्चारण और जयघोषों की गूंज से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो उठा है। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और युवा सभी इस कथा में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। आयोजन स्थल को भव्य रूप से सजाया गया है, जिससे वहां की पवित्रता और भी अधिक बढ़ गई है।
इस प्रकार गहना ग्राम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनी हुई है, बल्कि समाज को एकता, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संदेश भी दे रही है। आने वाले दिनों में भी इस कथा के माध्यम से श्रद्धालु इसी प्रकार भक्ति रस में डूबकर जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करते रहेंगे।
