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गोरखपुर

सेमीकंडक्टर शोध में डॉ. अंकित वर्मा को 70 लाख का अनुदान

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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंकित वर्मा ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। डॉ. वर्मा को शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत प्रतिष्ठित संस्था ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF)’ द्वारा 70 लाख रुपये की शोध अनुदान राशि प्रदान की गई है। डॉ. वर्मा ने गत वर्ष ‘डेवलपमेंट ऑफ ट्रांसपेरेंट एंड फ्लेक्सिबल सेमीकंडक्टर डिवाइसेज फॉर नेक्स्ट जेनरेशन इलेक्ट्रॉनिक्स’ विषयक अनुसंधान प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसे एएनआरएफ ने स्वीकृत करते हुए यह अनुदान प्रदान किया है।

यह शोध परियोजना भविष्य के उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास के लिए पारदर्शी एवं लचीले सेमीकंडक्टरों के निर्माण पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य हल्के, लचीले और पारदर्शी इलेक्ट्रॉनिक घटकों का विकास करना है, जिन्हें पहनने योग्य उपकरणों, स्मार्ट डिस्प्ले, स्वास्थ्य निगरानी प्रणालियों तथा फोल्डेबल गैजेट्स में प्रभावी रूप से उपयोग किया जा सके। वर्तमान में प्रयुक्त पारंपरिक सेमीकंडक्टर अपेक्षाकृत कठोर होते हैं, जबकि यह शोध उनकी सीमाओं को दूर कर अधिक ऊर्जा-कुशल, टिकाऊ एवं बहुउद्देशीय उपकरणों के विकास की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगा।

इस तकनीक के माध्यम से उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ चिकित्सा, रक्षा एवं संचार क्षेत्रों में भी व्यापक परिवर्तन की संभावना है। साथ ही, यह उत्पादन लागत में कमी, उपकरणों की पोर्टेबिलिटी में वृद्धि तथा पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देकर भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान करेगी।

डॉ. वर्मा की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में सेमीकंडक्टर अनुसंधान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भारत सरकार की ‘सेमिकॉन इंडिया’ पहल को भी बल प्रदान करेगी। उन्होंने इस सफलता के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति एवं अपने मार्गदर्शक प्रो. जे. पी. सैनी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं सतत सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही, विभागाध्यक्ष प्रो. एस. के. सोनी सहित विभाग के सभी सहकर्मियों के प्रति भी उन्होंने कृतज्ञता ज्ञापित की।

उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन नेक्स्ट जेनरेशन सेमीकंडक्टर्स एंड नैनोडिवाइसेस’ की स्थापना की जा रही है। यह शोध अनुदान इस केंद्र को और अधिक सशक्त बनाएगा। यह केंद्र सेंसर, सोलर सेल, एलईडी तथा चिप निर्माण जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा, जिससे भविष्य की उन्नत तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित होगा।

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