वाराणसी
गंगा तट पर आशा भोसले के गीतों ने जीता था काशीवासियों का दिल
वाराणसी। स्वर साम्राज्ञी आशा भोसले के रविवार को निधन के बाद काशी उनकी यादों में डूब गई है। करीब नौ साल पहले अप्रैल 2017 में उनका काशी आगमन आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने बनारसी साड़ियों की खरीदारी की थी और एक सांस्कृतिक आयोजन में भाग लेकर शहर से अपना जुड़ाव और गहरा किया था।
23 अप्रैल 2017 की रात गंगा तट पर संगीत की दो महान हस्तियों का अद्भुत संगम देखने को मिला था। एक ओर पद्मविभूषण गिरिजा देवी, जिन्हें अप्पाजी के नाम से जाना जाता है, और दूसरी ओर आशा भोंसले थीं। दोनों ही महान कलाकारों के स्वागत में हजारों काशीवासी मौजूद रहे। काशी में अपने पहले आगमन पर आशा भोंसले ने अपने लोकप्रिय गीतों के मुखड़े प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया।
यूनेस्को के सहयोग से नगर निगम और पहल संस्था द्वारा भैंसासुर घाट पर आयोजित ‘सुर गंगा’ महोत्सव में रात करीब नौ बजे आशा भोंसले मंच पर पहुंचीं। सम्मान से अभिभूत होकर उन्होंने ‘प्रेम में तोहरे ऐसी पड़ी मैं, पुराना जमाना नया हो गया, ये क्या हो गया’ गाकर श्रोताओं की फरमाइश पूरी की।
इसके बाद उन्होंने ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को, नजर नहीं चुराना सनम’ सुनाया। जब दर्शकों ने एक और गीत की मांग की तो उन्होंने गले में तकलीफ होने की बात कही, लेकिन मंच पर मौजूद अभिनेता अन्नू कपूर ने उनका उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि उनका स्वर बिल्कुल ठीक है। इसके बाद आशा भोंसले ने ‘झुमका गिरा रे बरेली के बजार में’ की कुछ पंक्तियां प्रस्तुत कीं।
जब वह ‘शंकर भंडारी भोले, मस्तक पर चंद्र सोए’ भजन गाकर मंच से उतरने लगीं तो अन्नू कपूर ने उन्हें उनके लोकप्रिय गीत ‘पिया तू’ की याद दिलाई। इसके बाद जैसे ही उन्होंने ‘पिया तू अब तो आजा, शोला सा मन बहके आके बुझा जा’ गाया, अन्नू कपूर ‘मोनिका ओ माई डार्लिंग’ कहते हुए झूम उठे।
इस कार्यक्रम में गिरिजा देवी ने भी अपनी प्रस्तुति से समां बांधा। आशा भोंसले ने उस अवसर पर कहा था कि काशी आकर उन्हें लगा कि उन्हें यहां बहुत पहले आना चाहिए था। 84 वर्ष की आयु में पहली बार काशी आने को लेकर उन्होंने देर से पहुंचने का मलाल भी जताया।
गंगा तट पर मौजूद श्रोताओं से संवाद करते हुए उन्होंने बनारस की सुंदरता की तुलना बनारसी साड़ी से की थी। ‘हर-हर महादेव’ और ‘भोलेनाथ की जय’ के उद्घोष के साथ उन्होंने लोगों का दिल जीत लिया। उन्होंने श्रोताओं के प्रेम के प्रति आभार जताते हुए कहा था कि वह इस स्नेह से अभिभूत हैं। साथ ही उन्होंने बताया था कि वह भगवान शिव की भक्त हैं और अब तक 10 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुकी हैं। श्रोताओं के आग्रह पर उन्होंने चार चुनिंदा गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
