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गाजीपुर

महिला चिकित्सालय में अव्यवस्थाओं का साम्राज्य, दलालों के कब्जे में स्वास्थ्य सेवा!

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मोहम्मदाबाद (गाजीपुर) जयदेश। जनपद के मोहम्मदाबाद स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय इन दिनों बदहाली, लापरवाही और भ्रष्ट तंत्र का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यहां स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं और मरीजों की जिंदगी के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है।

अस्पताल में डॉक्टर और फार्मासिस्ट का गंभीर अभाव है, जिससे मरीजों को न इलाज मिल पा रहा है और न ही उचित परामर्श। सरकारी दवाओं का वितरण ठप पड़ा है, जिसके चलते गरीब मरीजों को मजबूरन बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।

बिजली कटते ही अस्पताल अंधेरे में डूब जाता है। न इन्वर्टर की सुविधा, न जनरेटर का इंतजाम शाम होते ही जच्चा-बच्चा केंद्र में भय का माहौल बन जाता है। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को न साफ-सफाई मिलती है और न ही न्यूनतम स्वास्थ्य मानक पूरे होते हैं।

लेकिन हालात यहीं तक सीमित नहीं हैं। अस्पताल परिसर में दलालों का खुला आतंक भी देखने को मिल रहा है। जैसे ही कोई मरीज अस्पताल पहुंचता है, ये दलाल स्टाफ के इर्द-गिर्द मंडराने लगते हैं और महंगी दवाएं लिखने का सीधा दबाव बनाते हैं। इतना ही नहीं, अनावश्यक जांच भी आसानी से लिख दी जाती हैं, जिससे मरीजों की जेब पर सीधा डाका पड़ता है।

सूत्रों के अनुसार, इन महंगी दवाओं और जांचों के पीछे मोटे कमीशन का खेल चलता है। यही वजह है कि मरीजों को सस्ती और सरकारी सुविधाओं से वंचित कर निजी दुकानों और पैथोलॉजी की ओर धकेला जा रहा है। यह पूरा खेल मरीजों की मजबूरी और सिस्टम की मिलीभगत पर टिका नजर आता है।

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अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। पीछे की दीवार टूटी होने से आवारा कुत्ते वार्ड तक पहुंच जाते हैं, जो जच्चा-बच्चा के लिए बड़ा खतरा है। वहीं अस्पताल परिसर में एंबुलेंस की जगह फल के ठेले कब्जा जमाए हुए हैं। विरोध करने पर विवाद और मारपीट तक की नौबत आ जाती है, जिससे स्टाफ भी खौफ में काम करने को मजबूर है।

क्षेत्र की बड़ी आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है, लेकिन यहां की बदहाल व्यवस्था ने लोगों को जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों के चक्कर काटने पर मजबूर कर दिया है। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक मरीजों की जिंदगी से यूं ही खिलवाड़ होता रहेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कोई कार्रवाई करेंगे, या फिर मोहम्मदाबाद का यह अस्पताल यूं ही अव्यवस्थाओं और दलालों के कब्जे में सिसकता रहेगा?

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