गाजीपुर
सनातन के खिलाफ रचा जा रहा गहरा षडयंत्र : लक्ष्मीमणि शास्त्री
सैदपुर (गाजीपुर) जयदेश। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी विवाद में सनातनी धर्म में आस्था रखने वाले लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे है। हिंगलाज सेना की राष्ट्रीय अध्यक्ष साध्वी लक्ष्मीमणि शास्त्री ने बिछुड़ननाथ महादेव धाम के मुक्तिकुटी में अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी पर लगे आरोप और विवादित मठ के विषय में बताया कि आश्रम और मठ हर सनातनी के लिए सदैव खुला रहता है। यहां किसी प्रकार का छिपाने योग्य कोई चीज नही है।
ऐसे विवादित प्रकरण से सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म पर गहरा कुठाराघात हो रहा है। पचीस सौ वर्ष पुराने सनातन के सबसे बड़े व पूज्य धर्माचार्य पर ऐसे घिनौना आरोप मानवता सहित शंकराचार्य परंपरा का घोर अपमान है। सनातन संस्कृति को अपमानित और समाप्त करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बाल्यकाल से ही जानने और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी द्वारा दीक्षित किये जाने की साक्षी रहने वाली लक्ष्मीमणि शास्त्री ने बताया कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी ने इस मठ की स्थापना के समय ही यहां बालक बटुक वेदपाठियों के शिक्षा का व्यवस्था किया था। बालिकाओं के लिए अलग से मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में आश्रम बनाया गया है। हिंगलाज सेना सहित बालिका मठ का प्रभार हमारे जिम्मे है। आरोप लगाने वाले खुद को सनातनी ब्रह्मचारी कहते है और सनातनियों के आस्था पर इतना बड़ा आघात करते है। जिन बच्चों के नाम से आरोप लगाया जा रहा है उनका इस मठ में कोई रिकॉर्ड ही नही है।
लक्ष्मीमणि शास्त्री ने कहा कि न जाने किसके षडयंत्र से यह सब हो रहा है जो भी ऐसा कर रहा या करवा रहा है। उसका पतन निश्चित है जब जब धर्म पर हमला किया गया है तब तब स्वयं भगवान स्वयं आकर उसका समूल नष्ट किया है। इस विवादित प्रकरण में जीते कोई भी पर सनातन संस्कृति की हार हो रही है। देश में सनातन का जगा हुआ स्वाभिमान कुछ लोगों को पच नही रहा था। यह सब उन्ही लोगों का षडयंत्र भी हो सकता है।
संत समाज और सनातनियों के आक्रोश को देखते हुए इस प्रकरण का जल्द न्यायोचित निराकरण किया जाए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बाल्यकाल से ही सभ्य, शिक्षित एवं संस्कारी शिष्य की भांति रहे है। इसीलिए स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ने उनकी विशिष्टता देखकर ही उन्हें दीक्षा दिया और उन्हें शंकराचार्य की पदवी प्रदान किया है।
