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मऊ

घोसी सांसद राजीव राय पहुंचे मास्को, भारत-रूस ने आतंकवाद पर की गहन चर्चा

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मऊ। घोसी लोकसभा से सांसद राजीव राय के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल आतंकवाद के सभी रूपों से मुकाबला करने में भारत के संकल्प को दर्शाने के लिए मास्को पहुंचा। मास्को में भारत के राजदूत विनय कुमार ने प्रतिनिधिमंडल और मंजीव पुरी को भारत-रूस संबंधों के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी, जिससे वार्ता की शुरुआत से पहले प्रतिनिधिमंडल को आवश्यक पृष्ठभूमि मिल सके।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने रूसी संघ की फेडरेशन काउंसिल में अंतर्राष्ट्रीय मामलों की समिति के प्रथम उप-अध्यक्ष एंड्री डेनिसोव और अन्य सीनेटरों के साथ बैठक की। स्टेट ड्यूमा की इंटरनेशनल अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष लियोनिद स्लटस्की और अन्य सदस्यों ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया और द्विपक्षीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।

रूसी संघ के उप विदेश मंत्री एंड्री रुडेंको ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, रूस के पूर्व प्रधानमंत्री और वर्तमान में रूसी सामरिक अध्ययन संस्थान (RISS) के प्रमुख मिखाइल फ्रैडकोव ने भी प्रतिनिधिमंडल के साथ उपयोगी बातचीत की।

उन्होंने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, विशेष रूप से आतंकवाद से उत्पन्न खतरों पर अपने विचार साझा किए।प्रतिनिधिमंडल ने रूस के प्रमुख थिंक टैंकों जैसे एमएसयू, आईएमईएमओ, एचएसई, आरआईएसी और स्कोल्कोवो के सदस्यों से भी बातचीत की।

इस दौरान वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, भारत द्वारा आतंकवाद से निपटने के लिए अपनाए जा रहे नए दृष्टिकोण और भारत-रूस सहयोग को और गहरा करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।मीडिया से बातचीत में राजीव राय ने कहा कि रूस में हमने कई उच्चस्तरीय अधिकारियों से बातचीत की।

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रूस भारत का सबसे पुराना और भरोसेमंद मित्र रहा है और आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में वह भारत के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर की घटना एक प्रतिक्रिया, एक लक्षण और एक निदान थी। जब तक हम इसकी जड़ों को खत्म नहीं करते—जो पाकिस्तान में हैं—और जब तक हम वहाँ चल रहे आतंकवादी शिविरों को समाप्त नहीं करते तथा पाकिस्तान को ऐसे तत्वों से दूरी बनाने के लिए मजबूर नहीं करते, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।

जो देश यह सोचते हैं कि उनके यहाँ होने पर यह आतंकवाद है और भारत में होने पर यह भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला मात्र है, उन्हें अपनी सोच बदलनी होगी। आतंकवाद कहीं भी हो, वह वैश्विक खतरा है और इसका एकजुट होकर मुकाबला करना ही समाधान है।”

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