बलिया
25 वर्षों से संघ की शाखा से जुड़े हैं रसड़ा के नसीम सिद्दीकी
बोले— ‘संघ ने सिखाया अनुशासन, राष्ट्र सर्वोपरि और सेवा का भाव’
रसड़ा (बलिया)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रति समाज में प्रचलित विभिन्न धारणाओं के बीच बलिया के रसड़ा नगर के उत्तर पट्टी निवासी नसीम सिद्दीकी पिछले करीब 25 वर्षों से संघ की शाखा से जुड़े हुए हैं। एक साधारण मुस्लिम परिवार से आने वाले नसीम सिद्दीकी का कहना है कि संघ ने उन्हें अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता, सेवा भावना और राष्ट्र को सर्वोपरि मानने की प्रेरणा दी है।
नसीम सिद्दीकी बताते हैं कि जीवन में अनेक सामाजिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने राष्ट्रहित और समाज सेवा के मार्ग को नहीं छोड़ा। उनका मानना है कि किसी भी संगठन के बारे में राय बनाने से पहले उसके कार्यों और उद्देश्यों को निकट से समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संघ की शाखा में उन्हें समय की पाबंदी, अनुशासन, संगठन क्षमता, सामाजिक एकता और सेवा भावना जैसे जीवनोपयोगी संस्कार मिले। उनके अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य राष्ट्र सेवा, समाज सेवा और भारत की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाना है।
नसीम सिद्दीकी ने बताया कि समाज सेवा की प्रेरणा उन्हें अपने पिता मरहूम रशीद से मिली, जो जनहित के कार्यों में सक्रिय रहते थे। उन्होंने कहा कि परिवार में देश सेवा की परंपरा भी रही है। उनके परिवार के तीन सदस्य रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनके ज्येष्ठ पुत्र स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण किसी एक वर्ग या समुदाय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। नसीम सिद्दीकी ने कहा, “जो लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आलोचना करते हैं, उनसे मेरा आग्रह है कि वे एक बार शाखा में जाकर उसकी गतिविधियों को स्वयं देखें। इससे उन्हें संघ के उद्देश्य और कार्यशैली की वास्तविक जानकारी मिलेगी तथा उनकी कई भ्रांतियां स्वतः दूर हो जाएंगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और विभिन्न धर्मों, जातियों एवं समुदायों के लोग जब राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर साथ चलते हैं, तभी एक सशक्त, समरस और विकसित भारत का निर्माण संभव है।
