बलिया
लखनेश्वर नाथ धाम : लक्ष्मण जी ने स्थापित किया था शिवलिंग
श्रावण मास में तमसा तट स्थित प्राचीन शिवधाम में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, पास स्थित श्रीहरि विष्णु मंदिर भी आस्था का प्रमुख केंद्र
रसड़ा (बलिया)। श्रावण मास में भगवान शिव के प्राचीन मंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था चरम पर है। रसड़ा से लगभग सात किलोमीटर दक्षिण, तमसा नदी के तट पर स्थित लखनेश्वर नाथ धाम भी इन दिनों श्रद्धालुओं से गुलजार है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार यह वही स्थान है, जहां त्रेतायुग में भगवान लक्ष्मण ने शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की आराधना की थी। इसी मान्यता के कारण यह धाम क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है।
जनश्रुति से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
व्यापारी नेता एवं धर्मानुरागी सुरेशचंद जायसवाल के अनुसार स्थानीय मान्यता है कि महर्षि विश्वामित्र के साथ यज्ञ की रक्षा के लिए अयोध्या से बक्सर जाते समय भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने तमसा नदी के तट पर रात्रि विश्राम किया था। प्रातःकाल लक्ष्मण जी ने स्नान के बाद यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा-अर्चना की। बाद में भगवान श्रीराम ने इस स्थान का नाम ‘लखनेश्वर नाथ’ रखा, जो समय के साथ लखनेश्वर डीह के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
श्रावण में विशेष पूजन-अर्चना
श्रावण मास के दौरान यहां प्रतिदिन जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भक्तों का विश्वास है कि इस धाम में सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि, घंटियों की गूंज और भजन-कीर्तन से भक्तिमय बना हुआ है।
श्रीहरि विष्णु मंदिर भी आकर्षण का केंद्र
शिव मंदिर से लगभग 200 मीटर उत्तर स्थित प्राचीन श्रीहरि विष्णु मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। बताया जाता है कि वर्ष 1954 में खेत की जुताई के दौरान यहां भगवान विष्णु की प्राचीन काले पत्थर की प्रतिमा प्राप्त हुई थी। श्रद्धालु शिव और विष्णु दोनों मंदिरों में दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि और लोककल्याण की कामना करते हैं।
धार्मिक आयोजनों का प्रमुख स्थल
लखनेश्वर डीह स्थित दोनों प्राचीन मंदिर लंबे समय से क्षेत्रवासियों की आस्था के केंद्र हैं। यहां समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान, कलश यात्रा और कथा जैसे आयोजन होते रहते हैं। श्रावण मास में रसड़ा नगर सहित दूर-दराज के गांवों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों द्वारा मंदिर परिसर की स्वच्छता, सजावट और श्रद्धालुओं की सुविधा की विशेष व्यवस्था भी की गई है।
