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पीएम स्वनिधि योजना: पथ विक्रेताओं के जीवन में बदलाव की नई इबारत
वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनी योजना
नई दिल्ली। भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पथ विक्रेताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना आज लाखों परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री Manohar Lal Khattar ने एक लेख में योजना की उपलब्धियों और प्रभावों का उल्लेख करते हुए इसे वित्तीय समावेशन का प्रभावी मॉडल बताया है।
शहरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं पथ विक्रेता
मंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में कार्यरत पथ विक्रेता फल, सब्जियां, चाय, नाश्ता, कपड़े और दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराकर करोड़ों लोगों के जीवन को आसान बनाते हैं। इसके बावजूद लंबे समय तक उनकी बैंकिंग सेवाओं और सस्ती ऋण सुविधा तक पहुंच सीमित रही।
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने इस स्थिति को बदलते हुए उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान किया।
लाखों विक्रेताओं को मिला ऋण और पहचान
योजना के तहत लाखों पथ विक्रेताओं के बैंक खाते सक्रिय हुए और पहली बार उनकी औपचारिक ऋण संबंधी पहचान बनी। इससे भविष्य में उन्हें अन्य वित्तीय सेवाओं और ऋण सुविधाओं तक पहुंच आसान हुई है।
योजना की सफलता में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, शहरी निकायों और बैंकिंग संस्थानों के समन्वित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े 55 लाख से अधिक विक्रेता
योजना के अंतर्गत डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए त्वरित भुगतान प्रणाली आधारित लेन-देन को प्रोत्साहित किया गया। इसके परिणामस्वरूप 55 लाख से अधिक पथ विक्रेता डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ चुके हैं।
इससे उनके लेन-देन में पारदर्शिता आई है और उनकी वित्तीय साख भी मजबूत हुई है।
‘स्वनिधि से समृद्धि’ पहल से मिला सामाजिक सुरक्षा कवच
योजना के अंतर्गत लाभार्थियों और उनके परिवारों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का अभियान भी चलाया गया। अब तक 50 लाख से अधिक परिवारों का विवरण संकलित किया जा चुका है तथा करोड़ों लाभ स्वीकृत किए जा चुके हैं।
इसके माध्यम से पेंशन, बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं का लाभ लाभार्थियों तक पहुंच रहा है।
महिला सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण योगदान
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के कुल लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। इससे उनकी आय, सामाजिक सम्मान और पारिवारिक निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है।
आय में वृद्धि और जीवन स्तर में सुधार
स्वतंत्र मूल्यांकन रिपोर्टों के अनुसार योजना से जुड़े लाभार्थियों की आय में औसतन 20 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही आवास, स्वास्थ्य, पोषण और बच्चों की शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिला है।
वर्ष 2030 तक बढ़ाई गई योजना
योजना के सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसे पुनर्गठित स्वरूप में मार्च 2030 तक जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत ऋण सीमा बढ़ाई गई है तथा योजना का विस्तार नगर क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक किया गया है।
इसके साथ ही स्वनिधि ऋण पत्र जैसी नई सुविधाएं भी शुरू की गई हैं, जिससे पथ विक्रेताओं को अल्पकालिक ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
आगे की चुनौतियां और संभावनाएं
लेख में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई स्थानों पर पथ विक्रेताओं को अभी भी व्यवस्थित व्यापारिक स्थानों की कमी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकारों और शहरी निकायों को उन्हें शहरी नियोजन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।
इसके लिए सड़क भोजन केंद्र जैसी पहलें महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं, जिससे विक्रेताओं को बेहतर स्थान और नागरिकों को स्वच्छ एवं व्यवस्थित सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार कर रही है। यह योजना वित्तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण का ऐसा मॉडल बन चुकी है, जो आने वाले वर्षों में लाखों परिवारों के जीवन में और अधिक सकारात्मक बदलाव लाएगी।
