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वाराणसी

पितृपक्ष आरंभ महालयारम्भ

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रिपोर्ट – प्रदीप कुमार

वाराणसी: हिंदू पञ्चाङ्ग के अनुसार प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में श्राद्ध पक्ष पितृ पक्ष मनाया जाता है,।
इस महीने की शुरुआत पूर्णिमा तिथि से आरम्भ होती है और इसकी समाप्ति अमावस्या तिथि पर।
जो कि वस्तुतः इस वर्ष 29 सितंबर शुक्रवार से पितृ पक्ष महालयारम्भ आरंभ हो रहा हैं।
वस्तुतः यह 14 अक्टूबर शनिवार सर्वपितृ अमावस्या को पितृविसर्जन को सम्पन्न होगा।
उक्त जानकारी आयुष्मान ज्योतिष परामर्श सेवा केन्द्र के संस्थापक साहित्याचार्य ज्योतिर्विद आचार्य चन्दन तिवारी ने बताया कि सनातन धर्म के लोगों के लिए इन दिनों का विशेष महत्व होता है।
पितृ पक्ष पर पितरों की मुक्ति और उन्हें ऊर्जा देने के लिए श्राद्ध कर्म किये जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर पितृ नाराज हो जाएं तो घर के सदस्यों की तरक्की में बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं। ज्योतिष अनुसार भी कुंडली में पितृ दोष काफी महत्व रखता है।
इसलिए पितरों को मनाने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्राद्ध किये जाते हैं।
पितृ पक्ष के दौरान कोई भी नया काम शुरु नहीं किया जाता और ना ही नए वस्त्रों की खरीदारी होती है।

पितृ पक्ष श्राद्ध तिथियां ……..!!

29 सितंबर- पूर्णिमा श्राद्ध महालयारम्भ:।
30 सितंबर- प्रतिपदा
01 अक्टूबर- द्वितीया
02 अक्टूबर– तृतीया
03 अक्टूबर- चतुर्थी
04 अक्टूबर – पंचमी, महा भरणी
05 अक्टूबर- षष्ठी
06 अक्टूबर- सप्तमी
07 अक्टूबर- अष्ठमी
08 अक्टूबर- नवमी मातृनवमी
09 अक्टूबर- दशमी
10 अक्टूबर- एकादशी
11 अक्टूबर- द्वादशी,सन्यासी-यति वैष्णवानां श्राद्ध
12 अक्टूबर- त्रयोदशी
13 अक्टूबर- चतुर्दशी
14 अक्टूबर- सर्वपित्र अमावस्या,पितृ विसर्जनम्

श्राद्ध विधि :– श्राद्ध वाले दिन सुबह उठकर स्नान कर देव स्थान व पितृ स्थान को गाय के गोबर से लिपकर व गंगाजल से पवित्र कर लें।
महिलाएं शुद्ध होकर पितरों के लिए भोजन बनाने की तैयारी करें।
इसके बाद ब्राह्मण को घर पर बुलाकर या मंदिर में पितरों की पूजा और तर्पण का कार्य कराएं।
आप चाहें तो ये काम खुद भी कर सकते हैं। पितरों के समक्ष अग्नि में गाय का दूध, दही, घी और खीर अर्पित करें।
उसके बाद पितरों के लिए बनाए गए भोजन के चार ग्रास निकालें जिसमें एक हिस्सा गाय, एक कुत्ते, एक कौए और एक अतिथि के लिए रखें।
गाय, कुत्ते और कौए को भोजन डालने के बाद ब्राह्मण को आदरपूर्वक भोजन कराएं, उन्हें वस्त्र और दक्षिणा दें।
ब्राह्मण में आपका दामाद या भांजा (भगिना )भी हो सकता है।
यदि कोई व्यक्ति किसी कारणों से बड़ा श्राद्ध नहीं कर सकता तो उसे पूर्ण श्रद्धा के साथ अपने सामर्थ्य अनुसार उपलब्ध अन्न, साग-पात-फल और दक्षिणा किसी ब्राह्मण को आदर भाव से दे देनी चाहिए।

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श्राद्ध मंत्र – श्राद्ध पक्ष के दिनों में इस मंत्र का जाप करना चाहिए- ।।ऊॅं नमो भगवते वासुदेवाय।। जिस दिन श्राद्ध हो उस दिन श्राद्ध की शुरूआत और समापन में इस मंत्र का जाप करें-
।।देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वा्हायै स्वधायै नित्ययमेव नमो नमः।।

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