भदोही
परंपरागत खेती छोड़ अमरूद की बागवानी से नई मिसाल बना रहे प्रगतिशील किसान “सुरेश चंद्र उपाध्याय”
12 माह में लहलहाए थाई अमरूद के बाग, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने की सराहना
भदोही को कालीन के साथ अमरूद की पहचान दिलाने का संकल्प, पिता की प्रेरणा से अपनाई बागवानी
ज्ञानपुर (भदोही)। परंपरागत धान-गेहूं की खेती से आगे बढ़ते हुए प्रगतिशील किसान एवं समाजसेवी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने अमरूद की बागवानी अपनाकर नई मिसाल पेश की है। उनकी चार बीघा में तैयार की गई थाई अमरूद की बागवानी न केवल किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है, बल्कि कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का भी ध्यान आकर्षित कर रही है।
सुरेश चंद्र उपाध्याय ने बताया कि उन्हें बागवानी के लिए प्रेरणा अपने पिता स्वर्गीय राजाराम उपाध्याय से मिली, जो अपने समय के प्रगतिशील किसान थे। गन्ना, आलू और मक्का उत्पादन में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें कांग्रेस शासनकाल में तत्कालीन मंत्री श्याम सूरत उपाध्याय के हाथों सम्मानित किया गया था। उनके कृषि कार्यों पर लखनऊ से आई टीम ने एक डॉक्यूमेंट्री भी तैयार की थी।
उन्होंने बताया कि उनके बड़े पुत्र प्रशांत उपाध्याय ने रायबरेली, लखनऊ और अन्य स्थानों पर अमरूद की उन्नत बागवानी का अध्ययन करने के बाद उन्हें पारंपरिक खेती के साथ बागवानी अपनाने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने चार बीघा भूमि में थाई अमरूद के पौधे लगाए, जिनमें महज 12 से 13 माह के भीतर ही बेहतर गुणवत्ता के फल आने लगे।
बागवानी की सफलता देखने के लिए पूर्व विधायक विपुल दुबे, जिला उद्यान अधिकारी ममता सिंह यादव, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धीरेंद्र पांडेय, पूर्व जिला अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद दुबे, संजीव दुबे, राजेश पांडेय, गुजारी लाल उपाध्याय, मोतीलाल मिश्रा, राजेंद्र दुबे सहित कई गणमान्य लोग बाग का निरीक्षण करने पहुंचे और किसान के प्रयासों की सराहना की।
सुरेश चंद्र उपाध्याय ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपनी खेती को लाभकारी बनाना नहीं, बल्कि भदोही के किसानों को भी बागवानी के प्रति प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मलिहाबाद आम और प्रतापगढ़ आंवला के लिए प्रसिद्ध है, उसी तरह भदोही की पहचान कालीन उद्योग के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले अमरूद उत्पादन के लिए भी बने, यही उनका सपना है।
उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ बागवानी जैसी लाभकारी फसलों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती से कृषि को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है।
