गाजीपुर
न चौसा न दशहरी… बाजारों में छाया सिंदूरी आम
नंदगंज सहित गाजीपुर के बाजारों में बढ़ी मांग
नंदगंज (गाजीपुर)। इन दिनों शहर और बाजारों में सिंदूरी आम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। लालिमा लिए हुए छिलके और खट्टे-मीठे स्वाद वाला यह आम लगभग 100 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। दशहरी और लंगड़ा जैसे आमों के बीच अब लोग इस अलग किस्म के आम को भी पसंद कर रहे हैं।
लाल रंग और स्वाद ने खींचा ध्यान
खरीदारी करने पहुंचे विकास ने बताया कि उन्होंने पहली बार सिंदूरी आम को इतने करीब से देखा है। इसका लाल रंग काफी आकर्षक है और इसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है। गूदा भी पर्याप्त मात्रा में मिलता है। यह आम गाजीपुर शहर के साथ नंदगंज बाजार में पहली बार बड़ी मात्रा में दिखाई दे रहा है।
हेमंत बरनवाल ने बताया कि उन्होंने पहले भी यह आम खाया है, लेकिन बाजार में इसकी उपलब्धता कम थी। इस बार यह ज्यादा मात्रा में दिखाई दे रहा है। इसका स्वाद मीठा होता है और लाल छिलका इसकी अलग पहचान बनाता है। यह रोटी के साथ भी अच्छा लगता है, हालांकि कीमत अन्य आमों से थोड़ी अधिक है।
विटामिन से भरपूर माना जाता है
सिंदूरी आम भारत की पारंपरिक किस्मों में शामिल है। इसका नाम इसके छिलके पर दिखाई देने वाली सिंदूर जैसी लालिमा के कारण पड़ा है। यह देर से पकने वाली किस्म है, जो आमतौर पर दशहरी और लंगड़ा के मौसम के बाद बाजार में आती है।
जानकारों के अनुसार इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, प्राकृतिक शर्करा और एंटी ऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता, आंखों और त्वचा के लिए लाभकारी माने जाते हैं। साथ ही यह पाचन के लिए भी उपयोगी है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर होता है।
भंडारण में भी अधिक टिकाऊ
फल विक्रेताओं के अनुसार सिंदूरी आम की बाहरी परत अन्य आमों की तुलना में मजबूत होती है, जिससे यह परिवहन और भंडारण में अधिक टिकाऊ रहता है। यही कारण है कि अब यह बड़े बाजारों के साथ-साथ शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है।
