वाराणसी
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपित दोषमुक्त
साक्ष्यों के अभाव में विशेष पॉक्सो अदालत ने दिया संदेह का लाभ, खरीदारी के लिए निकली थी किशोरी
वाराणसी। नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपित को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नितिन पाण्डेय की अदालत ने बलिया निवासी राहुल गिरी को आरोप सिद्ध न होने पर संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव ‘गुड्डू’ और नरेश यादव ने पैरवी की।
बाजार से सामान लेने निकली थी किशोरी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता के पिता ने जैतपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि 10 अप्रैल 2023 को 12 वर्षीय किशोरी बाजार में आवश्यक सामान खरीदने गई थी। काफी समय बीतने के बाद भी घर वापस नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की और रिश्तेदारों से भी जानकारी ली, लेकिन उसका पता नहीं चला।
पुलिस ने शुरू की थी विवेचना
परिजनों के अनुसार, किशोरी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और उसका उपचार चल रहा था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान राहुल गिरी का नाम सामने आने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
बचाव पक्ष ने बयान को बनाया आधार
मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने किशोरी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि वह अपने चाचा द्वारा कथित मारपीट से परेशान होकर स्वयं घर से निकल गई थी और गोरखपुर पहुंची थी, जहां उसकी मुलाकात राहुल गिरी से हुई थी।
पांच गवाहों के बयान और साक्ष्यों का अवलोकन
अदालत में पीड़िता समेत कुल पांच गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। अदालत ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए। इसके बाद अदालत ने आरोपित राहुल गिरी को दोषमुक्त कर दिया।
