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गोरखपुर

जिला कारागार में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती

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गोरखपुर। जिला कारागार, गोरखपुर में भारतीय संविधान के शिल्पी, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती बड़े ही श्रद्धा, उल्लास एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर कारागार परिसर में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

इस अवसर पर अनवर आलम एडवोकेट, मोहम्मद राफे एडवोकेट, एडवोकेट तैय्यब अंसारी, एडवोकेट नूर आलम आदि समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों, जनप्रतिनिधियों, कारागार प्रशासन के अधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने डॉ. अंबेडकर के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की गई। डॉ. अंबेडकर ने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक भेदभाव को मिटाने और ऊंच-नीच की खाई को पाटने में समर्पित कर दिया। उन्होंने शोषितों और वंचितों को न्याय दिलाने के लिए संवैधानिक मार्ग प्रशस्त किया। बाबा साहेब का मानना था कि शिक्षा और स्वाभिमान ही मानवीय प्रगति के मूल स्तंभ हैं।

इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों और कारागार के बंदियों ने बाबा साहेब के पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया। कारागार प्रशासन द्वारा यह संदेश दिया गया कि सुधार और पुनर्वास की प्रक्रिया में बाबा साहेब के ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया गया और समाज में समरसता व भाईचारा बनाए रखने की अपील की गई। इस आयोजन ने कारागार के वातावरण में सकारात्मकता और वैचारिक चेतना का संचार किया।

इस अवसर पर कारागार अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर आधुनिक भारत के शिल्पकार थे। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में बाबा साहब की अद्वितीय भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने एक ऐसे न्यायपूर्ण समाज की नींव रखी, जहां हर नागरिक को समान अवसर प्राप्त हो। वहीं जेलर अरुण कुमार कुशवाहा ने महिलाओं के अधिकारों और उनके सशक्तिकरण पर बाबा साहब के विचारों को साझा किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी और उनके नेतृत्व का विकास आवश्यक है। उन्होंने न केवल कानून बनाया, बल्कि पुरुष और महिलाओं के सम्मान और समान अधिकारों की वकालत की।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय, जेलर अरुण कुमार कुशवाहा, एवं उप जेलर विनय कुमार, आदित्य कुमार, कृष्णा कुमारी व अमिता श्रीवास्तव तथा अन्य कारागार कर्मी उपस्थित रहे।

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