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वाराणसी

काशी में नंदोत्सव की धूम, भागवत कथा में झूम उठे श्रद्धालु

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वाराणसी के प्रमुख व्यवसायी अशोक कसेरा द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा प्रवचन में आज नंदोत्सव का आयोजन धूमधाम से हुआ। आचार्य व्रजेन्द्र व्यास जी महाराज के श्रीमुख से कथा श्रवण कर श्रोतागण भक्ति रस में लीन हो गए।

आचार्य जी ने श्रीमद् भागवत महापुराण को शास्त्रों और पुराणों का सार बताते हुए कहा कि यह मनुष्य जीवन को सूर्य की तरह प्रकाशमान बना देती है। उन्होंने यह भी कहा कि संसार में कुमार्ग पर बढ़ते मनुष्य को धर्म के मार्ग पर लाने का सबसे सरल साधन भागवत श्रवण है।

कथा में महाभारत के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए महाराज ने बताया कि जब अर्जुन और दुर्योधन भगवान से वरदान मांगने गए, तो दुर्योधन ने भगवान की सेना और अस्त्र-शस्त्र मांगे जबकि अर्जुन ने केवल भगवान को ही मांगा। इस कारण महाभारत के युद्ध में दुर्योधन और उसके सौ भाई मारे गए जबकि अर्जुन और उनके चारों भाई सुरक्षित रहे। आचार्य जी ने कहा कि जो व्यक्ति भगवान से केवल भगवान को ही मांगता है वही उनका सच्चा भक्त है।

महाराज ने मन्वंतर कथा के दौरान प्रियव्रत और उत्तानपाद राजाओं का चरित्र, ध्रुव जी की तपस्या, गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन और वामन अवतार की कथाएं सुनाईं। इसके बाद गंगा अवतरण और चंद्रवंश के साथ भगवान कृष्ण के जन्म की लीला का वर्णन किया।

उन्होंने बताया कि वासुदेव शुद्ध मन और देवकी शुद्ध बुद्धि का प्रतीक हैं। जब मनुष्य भागवत कथा सुनकर अपने मन और बुद्धि को शुद्ध करता है, तो भगवान कृष्ण उसके हृदय में प्रकट होते हैं।

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कथा के दौरान भजनों “नंद घर आनंद भयो” और “जय कन्हैया लाल की” पर श्रद्धालु झूम उठे। भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। कथा के समापन पर सभी श्रोतागणों को प्रसाद वितरित किया गया।

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