गोरखपुर
एम्स गोरखपुर में मेडिको-लीगल शव परीक्षण सेवाओं का एक वर्ष पूर्ण
वैज्ञानिक और निष्पक्ष फॉरेंसिक सेवाओं से न्यायिक प्रक्रिया को मिला सशक्त सहयोग
हत्या, आत्महत्या, सड़क दुर्घटना और विषाक्तता सहित जटिल मामलों में विशेषज्ञ राय से जांच एजेंसियों को मिली मदद
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग द्वारा संचालित मेडिको-लीगल शव परीक्षण सेवाओं ने 10 जून 2026 को अपना एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। पिछले एक वर्ष में विभाग ने वैज्ञानिक, निष्पक्ष और समयबद्ध फॉरेंसिक सेवाएं प्रदान करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से प्राप्त संवेदनशील एवं जटिल मामलों में पुलिस प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था को महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
एक वर्ष में अनेक महत्वपूर्ण मामलों का सफल परीक्षण
10 जून 2025 से शुरू हुई इस सेवा के तहत विभाग ने हत्या, आत्महत्या, सड़क दुर्घटना, विषाक्तता, डूबने, फांसी तथा अन्य अस्वाभाविक मृत्यु के मामलों में शव परीक्षण कर साक्ष्य आधारित विशेषज्ञ राय उपलब्ध कराई। विभाग की टीम में विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज परचाके, डॉ. यशवंत कुमार सिंह, डॉ. आशीष सराफ (मॉर्चरी प्रभारी) तथा डॉ. नवनीत अटेरिया शामिल रहे।
हाई-प्रोफाइल मामलों में निभाई अहम भूमिका
विभाग ने कई संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामलों में वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर मृत्यु के कारणों का सटीक निर्धारण किया। विशेष रूप से आग्नेयास्त्र (गनशॉट) से हुई मौतों के मामलों में विभाग की निष्पक्ष और तथ्यपरक रिपोर्ट ने जांच एजेंसियों को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
एक महत्वपूर्ण मामले में विभाग ने शव परीक्षण के आधार पर मृत्यु का कारण हृदयाघात स्थापित किया, जिससे जांच एजेंसियों को सही निष्कर्ष तक पहुंचने में सहायता मिली और अनावश्यक संदेह दूर हुए।
चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण में भी अग्रणी भूमिका
फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी सक्रिय योगदान दे रहा है। मॉर्चरी में एमबीबीएस विद्यार्थियों, जूनियर रेजिडेंट्स तथा प्रशिक्षुओं को शव परीक्षण तकनीक, मेडिको-लीगल दस्तावेजीकरण, साक्ष्य संरक्षण, मॉर्चरी प्रबंधन एवं न्यायालयीन प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदनशीलता को दी प्राथमिकता
विभाग पुलिस प्रशासन, न्यायिक संस्थाओं एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए कार्य करता है। साथ ही मृतकों के परिजनों को आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन देकर मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाता है, जिससे संस्थान के प्रति विश्वास कायम रहता है।
कार्यपालक निदेशक ने दी बधाई
“न्यायिक व्यवस्था और समाज की महत्वपूर्ण सेवा कर रहा विभाग”
एम्स गोरखपुर की कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता (सेवानिवृत्त) ने विभाग को बधाई देते हुए कहा कि मेडिको-लीगल शव परीक्षण सेवाओं का एक वर्ष पूर्ण होना संस्थान के लिए गर्व का विषय है। विभाग ने वैज्ञानिकता, निष्पक्षता और व्यावसायिक उत्कृष्टता के उच्च मानक स्थापित करते हुए न्यायिक व्यवस्था और समाज की महत्वपूर्ण सेवा की है।
विभागाध्यक्ष ने टीम की उपलब्धि को सराहा
विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज परचाके ने कहा कि फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग का उद्देश्य वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर विश्वसनीय और निष्पक्ष मेडिको-लीगल सेवाएं उपलब्ध कराना है। पिछले एक वर्ष में विभाग ने अनेक जटिल मामलों में सटीक विशेषज्ञ राय देकर न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत किया है।
मॉर्चरी प्रभारी बोले— फॉरेंसिक सेवाएं न्याय का वैज्ञानिक आधार
मॉर्चरी प्रभारी डॉ. आशीष सराफ ने कहा कि मेडिको-लीगल शव परीक्षण केवल चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं बल्कि न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आधार है। विभाग ने प्रत्येक मामले में साक्ष्यों के संरक्षण, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और निर्धारित मानकों के अनुरूप शव परीक्षण सुनिश्चित किया है।
भविष्य में भी उत्कृष्ट सेवाएं जारी रहेंगी
फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग ने भविष्य में भी उच्च गुणवत्ता वाली मेडिको-लीगल सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के माध्यम से समाज तथा न्यायिक व्यवस्था की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
