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बलिया

आलोचना से आगे: क्यों नरेंद्र मोदी आज भी करोड़ों भारतीयों की पहली पसंद हैं

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रसड़ा की सामाजिक कार्यकत्री ऋचा वर्मा ने कहा- लोकतंत्र में आलोचना जरूरी, लेकिन संवाद तथ्यों पर आधारित होना चाहिए

रसड़ा (बलिया)। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में किसी भी प्रधानमंत्री की आलोचना होना स्वाभाविक है। लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि सत्ता से सवाल पूछे जाएं और नीतियों पर चर्चा हो। लेकिन जब आलोचना तथ्यों के बजाय पूर्वाग्रह, अफवाह या राजनीतिक विरोध पर आधारित हो जाए, तो उसका तथ्यात्मक जवाब देना भी जरूरी हो जाता है। यह कहना है रसड़ा की सामाजिक कार्यकत्री ऋचा वर्मा का।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी अक्सर यह आरोप लगाते हैं कि देश में विकास नहीं हुआ, लेकिन पिछले वर्षों में सड़क, एक्सप्रेसवे, रेलवे, मेट्रो, हवाई अड्डों और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में हुए विस्तार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों तक सरकारी सुविधाओं की पहुंच आसान बनाई है।

ऋचा वर्मा ने कहा कि कुछ लोग सरकार की योजनाओं को केवल प्रचार बताते हैं, लेकिन उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत अभियान और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा है। इन योजनाओं के प्रभाव पर अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन इन्हें केवल प्रचार कहकर खारिज करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि विदेश नीति के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को लेकर अलग-अलग मत हैं। समर्थकों का मानना है कि जी-20 की अध्यक्षता, विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक साझेदारियां और वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका से देश की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत हुई है।

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सामाजिक कार्यकत्री ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में लगातार चुनाव जीतना जनता के विश्वास का संकेत होता है। यदि मतदाता बार-बार किसी नेतृत्व को चुनते हैं तो यह दर्शाता है कि समाज का एक बड़ा वर्ग उस नेतृत्व की नीतियों और कार्यशैली से संतुष्ट है। लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का ही होता है।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी भी सरकार के सामने चुनौतियां रहती हैं। बेरोजगारी, महंगाई, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर लगातार बहस और सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में आलोचना जरूरी है, लेकिन वह तथ्यों, संतुलन और रचनात्मक सुझावों पर आधारित होनी चाहिए।

ऋचा वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक उनके निर्णायक नेतृत्व, तेज निर्णय क्षमता, डिजिटल परिवर्तन, बुनियादी ढांचे के विकास और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को उनकी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में देखते हैं, जबकि विरोधी कई नीतियों पर अपनी असहमति रखते हैं। लोकतंत्र की विशेषता यही है कि दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि किसी भी नेता का मूल्यांकन केवल राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि उसके कार्यों, उपलब्धियों, कमियों और जनता के जनादेश के आधार पर किया जाना चाहिए। लोकतंत्र में सबसे बड़ा निर्णयकर्ता न सत्ता होती है और न विपक्ष, बल्कि भारत की जनता होती है, जो समय-समय पर अपने मत के माध्यम से नेतृत्व का चयन करती है।

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