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वाराणसी

आचार्य शांतनु महाराज ने शौर्य कथा कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता पर दिया संदेश

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वाराणसी। क्षत्रिय धर्म संसद काशी के तत्वावधान में आयोजित शौर्य कथा कार्यक्रम में कथावाचक पूज्य आचार्य शांतनु जी महाराज ने राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता पर जोर देते हुए महत्वपूर्ण संदेश दिया।

आचार्य शांतनु जी ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि वनवास के दौरान उन्होंने राजसी सुख-सुविधाओं का त्याग किया, लेकिन शास्त्र और धर्म के मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा और उन्नति के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों का संतुलन जरूरी है।

आचार्य जी ने हिंदू समाज की एकता पर बल देते हुए कहा कि संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है। उन्होंने तुष्टिकरण की नीतियों को राष्ट्र के लिए घातक बताते हुए ग्रामीण भारत के महत्व पर भी प्रकाश डाला। “भारत की आत्मा गांवों में बसती है,” उन्होंने कहा और युवाओं से अपने इतिहास, परंपराओं और संस्कारों से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्य जी के विचारों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय सिंह गौतम ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रणविजय सिंह ने प्रस्तुत किया। डॉ. रमेश प्रताप सिंह, अजीत सिंह बब्बू, महेश्वर सिंह, संजीव सिंह, प्रसिद्ध नारायण सिंह, अरुण सिंह, किरण सिंह, नागेश सिंह, ठाकुर कुश प्रताप सिंह, राजेश, डॉ. अतुल सिंह, अंबिका सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

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