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वाराणसी

अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस (25 नवम्बर) पर विशेष

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अब वह नहीं सहती हैं अत्याचार, खुलकर करती हैं प्रतिकार

• वन स्टॉप सेंटर के संग महिलायें जीत रही शोषण के खिलाफ जंग

• छह वर्ष में तीन हजार से अधिक महिलाओं को मिला न्याय

रिपोर्ट – प्रदीप कुमार

वाराणसी: शकुन्तला देवी (परिवर्तित नाम), उम्र 65 वर्ष बताती हैं कि सात वर्ष पूर्व पति के निधन के बाद इकलौते बेटे और बहू ने उन्हें इस कदर प्रताड़ित किया कि उन्हें अपना घर छोड़कर मायके में शरण लेना पड़ी । रिश्तेदारों ने बहू-बेटे को काफी समझाने की कोशिश की पर उनपर कोई फर्क नहीं पड़ा । शुरू में तो वह इसे अपनी किस्मत का दोष मानकर बर्दाश्त करती रहीं पर बाद में उन्हें लगा कि उन्हे इस अत्याचार के खिलाफ लड़ना चाहिए । तभी उन्हें एक रिश्तेदार ने ‘वन स्टॉप सेंटर के बारे में जानकारी दी । वहां पहुंच कर उन्होंने अपनी पूरी व्यथा सुनाई और न्याय की गुहार की । सेंटर ने उनके केस को दर्ज करने के साथ ही बहू-बेटे को तलब किया । वन स्टॉप सेंटर की पहल नतीजा रहा कि बेटा-बहू उन्हें सम्मान के साथ घर ले आये । अब वह अपने परिवार में काफी खुशहाल हैं । सेंटर से अक्सर हालचाल जानने के लिए फोन भी आता रहता है ।
सिगरा की रहने वाली संगीता (परिवर्तित नाम) के पति अक्सर ही नशे में धुत्त होकर घर लौटते और उसे पीटते थे । हद तो तब हो गयी जब घर का खर्च भी उठाना बंद कर दिया । तब संगीता ने वन स्टॉप सेंटर की मदद ली । सेंटर में उनके पति को बुलाया गया। सुधर जाने अथवा कार्रवाई के लिए तैयार रहने की बात समझायी । नतीजा हुआ कि संगीता के पति ने नशा करना छोड़ने के साथ ही घर की जिम्मेदारियां पुनः संभालनी शुरू कर दी । संगीता बताती हैं आज उनके जीवन में अगर खुशहाली है तो वह वन स्टॉप सेंटर की देन है । यह केन्द्र न होता तो उनका जीवन तो नर्क ही बन चुका था ।
शकुन्तला और संगीता तो महज एक नजीर हैं । पं. दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय परिसर स्थित ‘वन स्टॉप सेंटर’ छह वर्ष में तीन हजार से अधिक ऐसी महिलाओं को न्याय दिला चुका है जो शोषण का शिकार हो रही थीं ।
वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी रश्मि दुबे बताती हैं कि इस केन्द्र की स्थापना वर्ष 2016 में हुई थी । मकसद महिलाओं को शोषण से बचाने, न्याय दिलाने के साथ ही उन्हें कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक करना है । साथ ही ऐसी महिलाओं को स्वालम्बी बनाने में भी यह केन्द्र मदद करता है । वह बताती हैं कि वर्ष 2016 में आठ मार्च को इस केन्द्र की शुरूआत हुई और 31 मार्च 2016 तक 277 महिलाओं ने उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करायी। अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच 425 महिलाओं ने यहां उत्पीड़न की शिकायत की। अप्रैल 2018 से मार्च 2019 के बीच 816, अप्रैल 2019 से मार्च 2020 में 559, अप्रैल 2020 से मार्च 2021 में 457, अप्रैल 21 से मार्च 22 के बीच 417 के अलावा अप्रैल 2022 से अब तक 268 महिला उत्पीड़न की शिकायतें यहां दर्ज हुई, जिन्हें न्याय दिलाया गया।
भरोसे से आया बदलाव-
जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पाण्डेय कहते हैं यह बदलाव अचानक यूं ही नहीं आया । इसका पूरा श्रेय जाता है प्रदेश सरकार की महिला कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ वन स्टॉप सेंटर की कार्यशैली को जिसने महिलाओं को न्याय पाने के लिए इस केन्द्र के प्रति भरोसा जगाया है । वह कहते हैं कि दरअसल शिकायतों को लेकर थाना-चौकियों पर जाने के बजाय महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर पर जाना इसलिए ज्यादा सुविधाजनक लगता है, क्योंकि वहां उन्हें एक‘ पारिवारिक माहौल मिलता है। यहां तैनात महिला अधिकारियों से उन्हें अभिभावक जैसा व्यवहार मिलता है । वह उनकी पीड़ा को पूरी आत्मीयता से सुनती हैं और मदद भी करती हैं। यही कारण है कि अब महिलाएं शोषण के खिलाफ यहां शिकायतें दर्ज करा रहीं है। उन्हें भरोसा होता है कि यहां से उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा । वह कहते हैं कि वन स्टाप सेंटर का काम महिलाओं को न्याय दिलाने के साथ ही जीवन में खुशहाली लाना है। इस दिशा में यह केन्द्र पूरी तरह प्रयासरत है।

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