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वाराणसी

BHU : संविदा कर्मियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट सख्त

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जवाब दाखिल में लापरवाही पर पहले लग चुका जुर्माना

एक हफ्ते में प्रत्यावेदन, तीन महीने में अंतिम फैसला

वाराणसी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में बीते 12-13 वर्षों से संविदा पर कार्यरत गैर-शिक्षण कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की पीठ ने रिट याचिका संख्या 18901/2024 का निस्तारण करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से जवाब दाखिल करने में लगातार देरी और बार-बार समय मांगने की प्रवृत्ति पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया। इससे पूर्व की सुनवाई में न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने विश्वविद्यालय को अंतिम अवसर प्रदान करते हुए 2,000 रुपये का हर्जाना भी लगाया था, जिसे ‘हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद’ में जमा करने का निर्देश दिया गया था।

मामले में अनूप कुमार सहित 39 अन्य कर्मचारियों ने याचिका दाखिल कर बताया था कि वे वर्ष 2013-14 से BHU में ऑफिस असिस्टेंट और ऑडिट असिस्टेंट जैसे पदों पर लगातार सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय से कार्यरत रहने के बावजूद नियमितीकरण न होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली थी।

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न्यायालय ने अपने आदेश में याचिकाकर्ताओं को निर्देशित किया है कि वे एक सप्ताह के भीतर कुलपति के समक्ष नया प्रत्यावेदन प्रस्तुत करें। साथ ही कुलपति को तीन माह के भीतर इस मामले का अंतिम निर्णय लेने के लिए बाध्य किया गया है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय द्वारा हाल में जारी विज्ञापन संख्या 07/2024-2025 के तहत होने वाली नियुक्तियों को कुलपति के निर्णय के अधीन रखा गया है।

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