मिर्ज़ापुर
धान खरीद घोटाले की जांच पर उठे सवाल
किसानों ने लगाया लीपापोती का आरोप
‘आरोपी के विभागीय अधिकारियों को ही बनाया जांच अधिकारी’, स्वतंत्र जांच और कार्रवाई की मांग
मिर्जापुर/पहाड़ी। पड़री धान क्रय केंद्र पर कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि निष्पक्ष जांच के बजाय आरोपी अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

आईजीआरएस पर की गई थी शिकायत
जिला पंचायत सदस्य साजन कुमार गौतम ने आईजीआरएस के माध्यम से मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि पड़री क्रय केंद्र पर तैनात विपणन निरीक्षक दीपिका बर्नवाल पिछले कई वर्षों से एक ही जनपद में तैनात हैं तथा किसानों से कथित रूप से अवैध वसूली, बिचौलियों के माध्यम से खरीद और अनियमितताओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
शिकायत के बाद जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की, जिसमें विभाग के ही दो अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।
जांच प्रक्रिया पर शिकायतकर्ताओं ने उठाए सवाल
शिकायतकर्ता साजन कुमार गौतम और प्रधान संघ अध्यक्ष ब्यास जी बिंद का आरोप है कि जिस अधिकारी के विरुद्ध शिकायत की गई, उसी विभाग के समकक्ष अधिकारियों को जांच सौंपना निष्पक्ष जांच की भावना के विपरीत है। उनका आरोप है कि जांच के दौरान वास्तविक किसानों के बयान लेने में देरी की गई और बाद में चुनिंदा लोगों के बयान दर्ज कर औपचारिकता पूरी की गई।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत वापस लेने के लिए कथित रूप से एक लाख रुपये की पेशकश की गई। इन आरोपों के समर्थन में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या स्वतंत्र जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।
स्वतंत्र जांच की मांग
किसानों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित विपणन निरीक्षक के साथ-साथ जांच प्रक्रिया में लापरवाही या पक्षपात बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक पक्ष की प्रतीक्षा
इस मामले में शिकायतकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया या जांच के अंतिम निष्कर्ष अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
