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यूपी में बंद हो सकते हैं 27 हजार से अधिक स्कूल !

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पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा – गरीब बच्चे आखिर कहां और कैसे पढ़ेंगे?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार 50 से कम छात्रों वाले 27,764 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने की तैयारी कर रही है। शिक्षा विभाग ने यह कदम उन स्कूलों के विलय के लिए उठाया है, जहां छात्रों की संख्या पचास से कम है। इन विद्यालयों के छात्रों को पास के अन्य स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा।

डीजी (शिक्षा) कंचन वर्मा ने हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में राज्य के सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि 13 या 14 नवंबर को सभी बीएसए के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें इस योजना पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इस फैसले का राजनीतिक दलों ने कड़ा विरोध किया है। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को इन स्कूलों की बदहाली दूर करने और सुधार करने के बजाय उन्हें बंद करना उचित नहीं है। गरीब बच्चे आखिर कहां और कैसे पढ़ेंगे। अधिकांश राज्यों में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा का हाल बुरा है और इस तरह के फैसलों से गरीब परिवार के बच्चों की शिक्षा पर और प्रभाव पड़ेगा।

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आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस कदम की निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “दिल्ली में हमने सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए बहुत मेहनत की है, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसे स्कूलों को बंद करने की तैयारी हो रही है।” उन्होंने दिल्ली के मतदाताओं से आग्रह किया कि अगर उन्होंने बीजेपी को चुना तो दिल्ली में भी स्कूलों की ऐसी ही स्थिति हो सकती है।

कम छात्रों वाले स्कूलों का होगा विलय

शिक्षा विभाग ने जून में यू-डायस पोर्टल से छात्रों की संख्या का विवरण एकत्र किया था, जिससे पता चला कि 27,764 परिषदीय स्कूलों में 50 से कम छात्र हैं। विभाग ने इन स्कूलों का विवरण तैयार कर लिया है और कम नामांकन वाले स्कूलों का नजदीकी स्कूलों के साथ विलय करने की योजना बनाई है। डीजी कंचन वर्मा के अनुसार, “भारत सरकार स्कूलों को व्यावहारिक बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। इस योजना से प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।”

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