गाजीपुर
अल दीनदार शम्सी म्यूजियम में बेटियों ने देखीं ऐतिहासिक धरोहरें
डॉ. वसीम रज़ा अंसारी ने पुत्रियों नायाब ज़ोया और अदीबा नूर के साथ किया भ्रमण, निदेशक डॉ. कुँअर नसीम रज़ा सिकरवार ने दी विस्तृत जानकारी
दिलदारनगर (गाजीपुर)।जाने-माने समाजसेवी डॉ. वसीम रज़ा अंसारी ने अपनी पुत्रियों नायाब ज़ोया (कक्षा छह) और अदीबा नूर (कक्षा पांच), छात्राएं जामिया करीमिया, दिलदारनगर के साथ अल दीनदार शम्सी म्यूजियम एंड रिसर्च सेंटर का भ्रमण किया। इस दौरान म्यूजियम के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. कुँअर नसीम रज़ा सिकरवार ने दोनों छात्राओं को वहां संरक्षित ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और दुर्लभ वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

पुराने सिक्कों और नोटों ने खींचा ध्यान
म्यूजियम में दोनों छात्राओं ने पुराने समय के सिक्के, नोट और अनेक दुर्लभ वस्तुओं को उत्सुकता से देखा। घोड़े और घुड़सवार की आकृतियों वाले सैकड़ों देशी-विदेशी सिक्के, विभिन्न देशों के पुराने नोट, शून्य से लेकर अनेक शून्यों तक की मुद्रा संबंधी सामग्री, पुरानी ईंटें, शादी के कार्ड और सुजनी सहित कई प्राचीन वस्तुएं उनके आकर्षण का केंद्र रहीं। डॉ. सिकरवार ने इन धरोहरों के इतिहास और महत्व को समझाया।
सवाल पूछकर जानीं धरोहरों की विशेषताएं
दोनों छात्राओं ने वस्तुओं को देखने के साथ उनके इतिहास, उपयोग और विशेषताओं को लेकर कई सवाल भी किए। डॉ. कुँअर नसीम रज़ा सिकरवार ने उन्हें पुरानी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी जानकारियां दीं। इससे छात्राओं को अतीत को करीब से समझने का अवसर मिला।
बच्चों को विरासत से जोड़ना जरूरी
डॉ. सिकरवार ने कहा कि बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें इतिहास, संस्कृति और स्थानीय विरासत से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना भी आवश्यक है। म्यूजियम बच्चों में जिज्ञासा, शोध की भावना और अपने अतीत को समझने की रुचि विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
छात्राओं के लिए बना यादगार अनुभव
नायाब ज़ोया और अदीबा नूर के लिए म्यूजियम का यह भ्रमण ज्ञानवर्धक और यादगार शैक्षणिक अनुभव रहा। ऐतिहासिक वस्तुओं को करीब से देखकर दोनों छात्राओं ने नई जानकारियां हासिल कीं और अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर पाया।
