बलिया
यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित एमडीआर के विरोध में व्यापारियों ने उठाई आवाज
रसड़ा, बलिया। डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सरल और किफायती बनाए रखने की मांग को लेकर व्यापार कल्याण समिति रसड़ा के पदाधिकारियों ने प्रस्तावित यूपीआई शुल्क व्यवस्था के विरोध में आवाज उठाई। समिति के संरक्षक सुरेश चंद के नेतृत्व में व्यापारियों ने केंद्रीय वित्त मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी रसड़ा के माध्यम से भेजा और ₹2,000 से अधिक के कारोबारी यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था की समीक्षा की मांग की।
व्यापारियों ने बताया लेन-देन का प्रमुख माध्यम
ज्ञापन में समिति ने कहा कि यूपीआई भुगतान छोटे, मध्यम और लघु व्यापारियों के लिए लेन-देन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में कारोबारी वर्ग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में अतिरिक्त भुगतान लागत से छोटे कारोबारियों पर असर पड़ने की आशंका है।
नई व्यवस्था पर विचार-विमर्श की मांग
समिति ने मांग की कि छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क के बोझ से बचाया जाए। साथ ही डिजिटल भुगतान से जुड़ी नई व्यवस्था लागू करने से पहले व्यापारिक संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए, ताकि व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखा जा सके।
एमडीआर को लेकर समिति ने जताई आपत्ति
व्यापार कल्याण समिति ने स्पष्ट किया कि वह डिजिटल भुगतान व्यवस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि व्यापारियों पर लागू होने वाली प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था का विरोध कर रही है। समिति ने 15 अक्टूबर से लागू किए जाने की बात कही गई व्यवस्था को वापस लेने की मांग की।
सरकारी व्यवस्था में ग्राहक से शुल्क नहीं
केंद्र सरकार की 15 सितंबर 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार ₹2,000 तक के व्यापारी यूपीआई भुगतान पर एमडीआर नहीं लगेगा। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर का प्रावधान है, जबकि ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर यह प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर ग्राहक से लिया जाने वाला कर या सरकारी शुल्क नहीं है और व्यापारियों से इसे ग्राहकों पर डालने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
व्यापारियों ने रखी अपनी मांग
व्यापार कल्याण समिति के अध्यक्ष मुहम्मद युनूस, कार्यवाहक अध्यक्ष गोपाल जी, दीनदयाल शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी और व्यापारी इस अवसर पर मौजूद रहे। व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और कम लागत वाली बनाए रखने की मांग दोहराई।
