गाजीपुर
विरोध के बाद भी नहीं थम रही एमआरपी से अधिक दाम वसूलने की शिकायत
खानपुर सहकारी समिति पर खाद की निर्धारित कीमत से अधिक रकम लेने का आरोप, किसानों ने की जांच की मांग
खानपुर (गाजीपुर)। विकास खंड सैदपुर अंतर्गत खानपुर बाजार स्थित किसान सेवा सहकारी समिति पर खाद निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत पर बेचने का आरोप लगा है। मंगलवार को खाद वितरण के दौरान किसानों ने यूरिया, डीएपी और एपीएस की बोरियों पर अंकित एमआरपी से अधिक रकम वसूलने की शिकायत की। किसानों का आरोप है कि खाद की कीमत के अलावा प्रत्येक बोरी पर पांच रुपये पल्लेदारी के नाम पर भी लिए जा रहे हैं।

यूरिया, डीएपी और एपीएस की कीमत पर लगाया अधिक वसूली का आरोप
मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे समिति पर खाद लेने पहुंचे किसानों विनोद कनौजिया, राहुल, विनोद कुमार, रणधीर बिंद, राधेश्याम राजभर, भीम बिंद और कन्हैया बिंद ने आरोप लगाया कि यूरिया की बोरी पर 266.50 रुपये एमआरपी अंकित होने के बावजूद उनसे 280 रुपये लिए गए। इसी तरह डीएपी की बोरी 1350 रुपये के स्थान पर 1380 रुपये और एपीएस की बोरी 1450 रुपये के बजाय 1480 रुपये में दिए जाने का आरोप लगाया गया। किसानों ने प्रत्येक बोरी पर पांच रुपये अतिरिक्त पल्लेदारी वसूले जाने की भी शिकायत की।
खुद बोरी उठाने पर भी पल्लेदारी वसूलने का आरोप
किसानों का कहना है कि कई बार वे स्वयं खाद की बोरियां उठाकर अपने साधन पर लोड करते हैं, इसके बावजूद उनसे पांच रुपये प्रति बोरी पल्लेदारी के नाम पर लिए जाते हैं। किसानों के अनुसार, एमआरपी से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायत नई नहीं है और समिति पर पहले भी इस तरह के आरोप सामने आते रहे हैं।
विरोध करने पर अभद्रता और खाद न देने की धमकी का आरोप
किसानों का आरोप है कि निर्धारित एमआरपी से अधिक रकम वसूले जाने का विरोध करने पर समिति के कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया जाता है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने वाले लोगों को भविष्य में खाद नहीं देने की धमकी दी जाती है। ऐसे में किसान मजबूरी में निर्धारित कीमत से अधिक रकम देने को विवश हो जाते हैं।
अधिकारियों से जांच और कार्रवाई की मांग
किसानों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने, खाद की बिक्री निर्धारित एमआरपी पर सुनिश्चित कराने और पल्लेदारी के नाम पर होने वाली कथित अतिरिक्त वसूली बंद कराने की मांग की है। उनका कहना है कि खाद की किल्लत के बीच पहले से परेशान किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
मामले में सहकारी समिति के जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष लिया जाना बाकी है। किसानों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही एमआरपी से अधिक वसूली और पल्लेदारी के नाम पर रकम लिए जाने की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। किसानों ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
