बलिया
प्रेमचंद का साहित्य आज भी सामाजिक चेतना का प्रासंगिक दस्तावेज : प्रो. संतोष गुप्त
मुंशी प्रेमचंद जयंती पर गोष्ठी आयोजित, साहित्य और सामाजिक सरोकारों पर हुई चर्चा
बलिया। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर नगर में कबीरम् समाज, जनवादी लेखक संघ तथा अखिल भारतीय विश्वविद्यालय सम्बद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (एआईएफयूसीटीओ) सहित विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक संगठनों के तत्वावधान में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
प्रेमचंद का साहित्य आज भी प्रासंगिक
टी.डी. कॉलेज के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. संतोष प्रसाद गुप्त ने टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दयालानन्द राय को प्रेमचंद का चित्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1906 से 1936 के बीच रचित प्रेमचंद का साहित्य प्रगतिशील चेतना का महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक दस्तावेज है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। उन्होंने युवाओं से प्रेमचंद के विचारों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
‘कल तथा आज’ विषय पर हुई विचार गोष्ठी
जनवादी लेखक संघ की ओर से आयोजित ‘कल तथा आज’ विषयक विचार गोष्ठी में प्रो. जैनेन्द्र कुमार पाण्डेय, प्रो. मंजीत कुमार सिंह, प्रो. अखिलेश कुमार राय और प्रो. बृजेश कुमार सिंह त्यागी ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य गांधीवादी मूल्यों, सामाजिक परिवर्तन और जनसंघर्ष की चेतना का सशक्त माध्यम है।
सामाजिक मुद्दों पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली, संविदा कर्मियों के नियमितीकरण तथा अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी अपने विचार रखे। अंत में प्रो. संतोष प्रसाद गुप्त ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
