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चकबंदी कर्मचारी की इलाज के दौरान मौत, अधिकारी पर गंभीर आरोप

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संतकबीरनगर। जिले से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ चकबंदी विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी की मौत के बाद विभागीय कार्यप्रणाली और अधिकारियों के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक कर्मचारी के परिजनों ने विभागीय अधिकारियों पर संवेदनहीनता और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार चकबंदी कर्ता के पद पर कार्यरत मुकेश कुमार लंबे समय से बीमार चल रहे थे। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार इलाज के लिए अवकाश की मांग की, लेकिन उनकी प्रार्थना को लगातार नजरअंदाज किया गया। मृतक के पुत्र विकास और करन कुमार का कहना है कि जब उनके पिता ने बंदोबस्त अधिकारी से दवा कराने हेतु छुट्टी मांगी तो अधिकारी ने उनका प्रार्थना पत्र वापस कर दिया। इतना ही नहीं, सहायक चकबंदी अधिकारी को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश भी दे दिया गया।

परिवार के अनुसार बीमारी और मानसिक दबाव के बावजूद मुकेश कुमार लगातार विभागीय कार्यों का निर्वहन करते रहे। इसी बीच 21 अप्रैल 2026 को कार्यालय से लौटते समय मेंहदावल बस अड्डा के पास अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे सड़क पर गिर पड़े। आनन-फानन में उन्हें मेडिकल कॉलेज बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ जांच में पता चला कि उनके दिमाग की नस फट गई है।

हालत गंभीर होने पर उन्हें मेरठ रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।चकबंदी कर्मचारी मुकेश कुमार की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का आरोप है कि समय पर वेतन न मिलने के कारण इलाज में आर्थिक संकट भी झेलना पड़ा। उनका कहना है कि यदि समय रहते छुट्टी और उचित उपचार मिल जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी।

पीड़ित परिवार ने विभागीय संघ और शासन-प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई तथा आर्थिक सहायता की मांग की है। घटना के बाद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

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