वाराणसी
कारागार में गूंजा हास्य का फव्वारा, कवि सम्मेलन से बंदियों के जीवन में आई सरसता
वाराणसी। केन्द्रीय कारागार वाराणसी में सोमवार को “नई सुबह” संस्था के निदेशक डॉ. अजय कुमार तिवारी के प्रयास से भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कारागार में निरुद्ध बंदियों के नीरस जीवन में उत्साह और सकारात्मकता का संचार करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण वाराणसी राजीव मुकुल पाण्डेय ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया। इसके पश्चात सभी कवियों ने माँ सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त किया। वरिष्ठ जेल अधीक्षक राधाकृष्ण मिश्र ने उपस्थित कविगणों को माला एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।

मंच संचालन सिद्धनाथ शर्मा ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत निकिता द्वारा सरस्वती वंदना “शारदे माँ करूँ तेरी आराधना…” से हुई, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद संतोष कुमार प्रीत ने “मन में उमंग लिए प्यार भरा रंग लिए” सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं।
नवीन मौर्या ‘फायर बनारसी’ ने अपने व्यंग्य “माथे पर न शिकन है…” के माध्यम से सभी को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। वहीं आनंद कृष्ण श्रीवास्तव ‘मासूम’ ने “यदि रूप सजने के लिए एक दर्पण चाहिए” जैसी भावपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत कर खूब सराहना पाई।

मुख्य अतिथि राजीव मुकुल पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन बंदियों को मानसिक तनाव से बाहर निकालने में सहायक होते हैं। उन्होंने अपनी कविता “जीवन मधुबन सा सरस नहीं है” सुनाकर उपस्थित जनों का मन मोह लिया। वरिष्ठ जेल अधीक्षक राधाकृष्ण मिश्र ने कहा कि कारागार प्रशासन का प्रयास है कि बंदी अपने दुखों को भूलकर सकारात्मक सोच के साथ जीवन की ओर अग्रसर हों।
इस अवसर पर जेलर अखिलेश कुमार, शिव शक्ति जन कल्याण ट्रस्ट की संचालिका ईशा त्रिपाठी, डिप्टी जेलर अशोक कुमार राय, किशन सिंह वाल्दिया, राजाबाबू, अयोध्या प्रसाद सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
