गोरखपुर
“महिलाओं के सम्मान पर राजनीति नहीं, न्याय चाहिए” — महिला मोर्चा का सशक्त स्वर
गोरखपुर। भारतीय जनता पार्टी के महिला मोर्चा ने संसद में महिलाओं के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक के पारित न हो पाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। संगठन ने इसे केवल राजनीतिक गतिरोध नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों, सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य के साथ गंभीर अन्याय बताया है।
महिला मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवासन जी ने तीखे शब्दों में कहा कि “महिलाओं के अधिकारों पर राजनीति करना उनके सपनों और उनके आत्मसम्मान के साथ खिलवाड़ है। जो लोग इस विधेयक को रोक रहे हैं, वे केवल एक बिल नहीं, बल्कि देश की प्रगति और सामाजिक न्याय की राह को अवरुद्ध कर रहे हैं।”
प्रदेश अध्यक्ष गीता शाक्य ने भी विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि “यह रवैया उनकी संकीर्ण सोच और महिला विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। आज की महिलाएं जागरूक, सशक्त और अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं, वे अब इस प्रकार की राजनीति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगी।”
क्षेत्रीय अध्यक्ष अमिता गुप्ता ने भावुक शब्दों में कहा कि “महिलाओं के अधिकारों को दबाने का हर प्रयास उनके आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार है। यह केवल विरोध नहीं, बल्कि उन लाखों महिलाओं की आवाज़ को दबाने की कोशिश है, जो अपने अधिकारों के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही हैं।”
क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी संध्या त्रिपाठी ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि “यह अब साफ हो चुका है कि कुछ लोगों के लिए राजनीति, महिलाओं के सम्मान से भी ऊपर है। महिला मोर्चा इस मानसिकता का हर स्तर पर विरोध करेगा और समाज के बीच सच्चाई को पूरी मजबूती के साथ रखेगा।”
महिला मोर्चा ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि महिलाओं के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस विधेयक को शीघ्र पारित कराने के लिए सभी लोकतांत्रिक और संवैधानिक उपाय अपनाए जाएंगे, ताकि देश की महिलाओं को उनका अधिकार और सम्मान मिल सके। समापन में महिला मोर्चा ने एक सशक्त संदेश देते हुए कहा “जो महिला विरोधी, वही विकास विरोधी।”
