गोरखपुर
हरखापुर से पिपराइच तक भव्य शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब
आस्था, उल्लास और एकता का अद्भुत संगम
पिपराइच (गोरखपुर)। अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर भगवान श्री परशुराम जयंती के पावन पर्व ने पूरे क्षेत्र को भक्ति और आस्था के रंग में रंग दिया। ग्राम हरखापुर से निकली भव्य शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी।
शोभायात्रा का शुभारंभ हरखापुर से हुआ, जिसका नेतृत्व सभासद मनोज त्रिपाठी ने श्रद्धा भाव से किया। यात्रा जैसे-जैसे पिपराइच कस्बा, सिंघावल-सिधावल चौराहा सहित विभिन्न मार्गों से आगे बढ़ी, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं का जनसैलाब इसमें जुड़ता चला गया। पूरा वातावरण “जय परशुराम” और “जय श्रीराम” के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।
यात्रा में भगवान परशुराम के दिव्य स्वरूप से सुसज्जित रथ आकर्षण का केंद्र रहा। भजन-कीर्तन की मधुर धुनों ने हर हृदय को भावविभोर कर दिया। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया, मानो स्वयं श्रद्धा धरती पर उतर आई हो।
इस पावन अवसर पर प्रतीक, रितेश त्रिपाठी, आर्यन त्रिपाठी, राजा राजदेव ओमकार तिवारी त्रिपाठी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। छोटे-बड़े, महिला-पुरुष सभी वर्गों के लोग एक साथ आस्था के इस प्रवाह में डूबे नजर आए।
पिपराइच स्थित हनुमान मंदिर पर पहुंचकर शोभायात्रा का भव्य समापन हुआ। मंदिर परिसर में आयोजित विशेष आरती के दौरान वातावरण अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक हो उठा। दीपों की लौ, घंटों की ध्वनि और श्रद्धालुओं की प्रार्थनाओं ने ऐसा दिव्य दृश्य प्रस्तुत किया, जिसने हर मन को छू लिया।
श्रद्धालुओं ने भगवान परशुराम और हनुमान जी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का भी सशक्त संदेश दे गया।
अंत में आयोजकों ने सभी सहयोगियों, श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
